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FEEL GOOD MODE में सरकार, विधानसभा चुनाव से पहले सौगातों की बौछार

Ranchi : झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार सौगातों की झड़ी लगा रही है. हर क्षेत्र में सरकार कुछ ना कुछ अच्छा करने की कोशिश कर रही है. खास कर उस क्षेत्र में जिस क्षेत्र के लोग पिछले चार सालों से किसी सौगात के लिए टकटकी लगाए हुए थे.

सरकार का फील गुड वाले मोड में जाने का मतलब राजनीतिक पंडित अलग-अलग लगा रहे हैं. कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले सरकार अपनी छवि फ्लेक्सीबल बनाने की कोशिश कर रही है. रोजगार के मामले में जिस वजह से झारखंड की जनता सरकार से काफी खफा थी, उस ओर भी सरकार का ध्यान गया है. मानदेय कर्मियों पर भी सरकार की कृपा बरसनी शुरू हो गयी है. अब देखना होगा सरकार का ऐसा कदम वोट में कितना तब्दील हो पाता है.

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6th JPSC Interview

सरकार का सबसे चौंकाने वाला कदम 6th JPSC Interview है. अपने पांच साल के कार्यकाल में मौजूदा सरकार एक भी JPSC की परीक्षा क्लीयर नहीं करा पायी. इस बात से खास कर यूथ में काफी आक्रोश है. 6th JPSC परीक्षा का मामला कोर्ट में लंबित है.

इसके बावजूद सरकार ने 6th JPSC के लिए इंटरव्यू की तारीख तय कर दी है. 20 नवंबर 2019 से इंटरव्यू होना है. हाई कोर्ट का फैसला आने से पहले इंटरव्यू की तारीख तय करने के कारण जेपीएससी पर सवाल उठ रहें हैं. कुछ लोग इसे सरकार को राजनीतिक फायदा उठाने के लिये उठाया गया फैसला बता रहे हैं. छात्रों में गुस्सा है.

JSSC में ग्रेजुएशन स्तर के 1140 पदों पर बहाली

रघुवर सरकार का यह दूसरा चौंकाने वाला फैसला बताया जा रहा है. 2012 के बाद से ही सरकार की तरफ से JSSC ने एक भी परीक्षा नहीं ली थी. सरकारी क्षेत्र में रोजगार का मुद्दा काफी सुर्खियां बटोर रहा था. लेकिन रघुवर सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रवेश परीक्षा– 2019 के आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है.

जेएसएससी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 18 सितंबर से 17 अक्टूबर 2019 तक किया जा सकता है. जेएसएससी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार छह पदों में नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा ली जायेगी जिसमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 362 पद, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 223 पद, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के 139 पद, अंचल निरीक्षक सह कानूनगो के 170 पद, सहकारिता प्रसार पदाधिकारी के 241 पद व प्लानिंग अस्सिटेंट के 05 पद हैं.

ट्रैफिक रूल में रियायत

भारत सरकार की तरफ से जिस तरीके से एक सितंबर से ट्रैफिक रूल के जुर्माने में बढ़ोतरी हुई. ऐसा लगा कि पूरे देश में हाहाकार मच गया. झारखंड भी जुर्माने पर बढ़ी हुई कीमत से जल रहा था. कई ऐसी वारदात देखने को मिली जिसमें पब्लिक और प्रशासन आमने-सामने दिखे.

चुनाव सर पर होने की वजह से रघुवर सरकार को इस कानून में हस्तक्षेप करना पड़ा. अनऑफिशयल तरीके से सीएम रघुवर दास ने प्रशासन को निर्देश दिया कि तीन महीने तक किसी से कागजातों के लिए जुर्माना ना काटा जाय. बल्कि पुलिस की तरफ से कागजात बनाने के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाय.

इससे डीटीओ ऑफिस में लाइसेंस के लिए लग रही भीड़ में थोड़ी नरमी आयी. लोगों में इस कानून को लेकर जो गुस्सा था, वो कम हुआ. निश्चित तौर से चुनाव पर इस कानून के प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते थे. इसलिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा.

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पारा शिक्षकों को आंदोलन करने से रोका

अपनी मांगों को पूरा नहीं होते देख पारा शिक्षक दोबारा आंदोलन करने के मूड में थे. पीएम मोदी के कार्यक्रम में ही वो आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे थे. लेकिन इसी बीच सरकार ने मध्यस्ता की. अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 2020 तक का समय देने का आश्वासन राज्य सरकार ने दिया.

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल ने राज्य के पारा शिक्षकों को आश्वस्त किया है कि वे केंद्र को इस संबध में पत्र लिखेंगे और अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के लिये समय सीमा विस्तार करने की मांग करेंगे. इसके पहले झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की छंटनी का कार्य शुरू कर दिया गया था.

राज्य में अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की संख्या लगभग 4218 है.  पिछले कुछ दिनों पहले पारा शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबध में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल से मुलाकात की. जिसमें ये बातें सामने आयी. इसके बाद पारा शिक्षकों ने 12 सिंतबर को प्रधानमंत्री कार्यक्रम के दौरान विरोध-0प्रदर्शन और 16 सिंतबर को जमशेदपुर में सीएम आवास घेराव का कार्यक्रम स्थगित किया.

17 सिंतबर को शिक्षा परियोजना में पारा शिक्षकों के नियमावली पर बैठक आयोजित की गयी है. अगर बैठक में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 22 सिंतबर को फिर से पारा शिक्षक राज्य स्तरीय बैठक करेंगे. जिसमें आगे की रणनीति बनायी जायेगी.

कल्याण कोष का गठन

सरकार ने मानदेय पर काम करने वाले पारा शिक्षकों, कस्तुरबा स्कूल के शिक्षकों और राज्य के बीआरपी और सीआरपी सभी को विधानसभा चुनाव से पहले एक साथ खुश करने की कोशिश की है.

सरकार की तरफ से एक कल्याण कोष का गठन किया गया है. कल्याण कोष 10 करोड़ का है. इसमें हर महीने पारा शिक्षकों, कस्तुरबा शिक्षकों और बीआरपी सीआरपी को 200 रुपये अंशदान के तौर पर देना है. पारा शिक्षक, बीआरपी-सीआरपी व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में संविदा पर कार्यरत कर्मी किसी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा लाभ वाली योजना का लाभ अभी तक नहीं मिल रहा था.

2015 में हुए समझौता में कल्याण कोष के लिए सरकार द्वारा पांच करोड़ रुपये देने की स्वीकृति दी गयी थी. सरकार ने इसे बढ़ा कर 10 करोड़ कर दिया है. कल्याण कोष से लगभग 65 हजार पारा शिक्षक, 745 बीआरपी, 2529 सीआरपी व 1993 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में संविदा पर कार्यरत शिक्षक व कर्मियों को लाभ मिलेगा.

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