
Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ गिरिधारी राम गौंझू का गुरुवार को निधन हो गया है. जानकारी के अनुसार डॉ गिरिधारी राम गौंझू को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. उन्हें इलाज के लिए मेडिका अस्पताल, सेंटेविटा हॉस्पिटल और गुरुनानक अस्पताल में दाखिल करने के लिए ले जाया जाया गया था लेकिन कोविड जांच नहीं होने की बात कह कर उनको दाखिल नहीं किया गया. इसके बाद उन्हें कोविड जांच के लिए ले जाया गया लेकिन इसी दौरान उनका निधन हो गया.
डॉ गिरिधारी राम गौंझू नागपुरी भाषा के अच्छे जानकार थे. उनकी कई किताबें भी प्रकाशित हुई हैं. डॉ गिरिधारी राम गौंझू सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहते थे.
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सांस्कृतिक अखड़ा हुआ सूना: रणेंद्र
टीआरआइ के निदेशक रणेंद्र ने गिरिधारी राम का जाना बड़ी क्षति बताया है. उनके मुताबिक रामदयाल मुंडा, बीपी केशरी, भुवनेश्वर अनुज की कड़ी में वे भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे. वही इकलौते पुरोधा बचे थे जिनसे झारखंड की सांस्कृतिक अस्मिता बची हुई थी, संवर रही थी. अब गिरिधारी के जाने से रामदयाल मुंडा के युग की एक पीढ़ी ही खत्म हो गयी. वे अपने आप में अद्भुत इनसाइक्लोपीडिया थे. झारखंड की लोक कला, नृत्य, गायन, वादन, भाषा और अन्य विधाओं के जानकार थे. दो दर्जन से अधिक किताबें उन्होंने लिखी थीं. झारखंड के वाद्य यंत्रों, नागपुरिया संस्कृति, नृत्य, गीतों पर किताब लिखकर स्थानीय विरासत, पहचान को सहेजने का काम किया था.
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