
Ranchi: रांची के वरिष्ठ अधिवक्ता बंशी प्रसाद नहीं रहे. वह बंशी बाबू के नाम से मशहूर थे. सिविल मामलों में वह रांची में अद्वितीय माने जाते थे. वह कैथी लिपि के चुनिंदा जानकारों में थे. उन्होंने आज सुबह अंतिम सांस ली. अपराह्न में उनका अंतिम संस्कार चुटिया के स्वर्णरेखा नदी तट पर स्थित श्मसान घाट किया गया.
बंसी प्रसाद का जन्म रांची में एक जून 1934 को हुआ था. उन्होंने डाल्टनगंज जिला स्कूल से 1951 में मैट्रिक की परीक्षा पास की. इसके बाद पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल की.
स्नातक करने के बाद वे रांची में कल्याण विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर बहाल हो गये. 1965 में उनका स्थानांतरण हजारीबाग कर दिया गया लेकिन रांची नहीं छोड़ने के मोह के कारण उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया.
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इसके बाद उन्होंने छोटानागपुर लॉ कॉलेज से गोल्ड मेडल के साथ विधि की परीक्षा पास कर ली और 1968 में देवी बाबू वकील के सानिध्य में रांची सिविल कोर्ट में वकालत शुरू की.
वे ऐसे वकील थे कि बिहार, छत्तीसगढ़ और मघ्य प्रदेश के कई सीनियर वकील कानून संबंधी पेचीदगियों को सुलझाने के लिए उनके पास सलाह लेने के लिए आया करते थे. कैथी लिपि के दस्तावेजों में जब कोई अड़चन आती थी, तब भी लोग उसे सुलझाने के लिए बंशी बाबू के पास जाते थे.
उच्चतम न्यायालय के जस्टिस एम वाई इकबाल ने रांची सिविल कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि बंशी बाबू मेरे भी गुरु रहे हैं. मैंने इनसे बहुत कुछ सीखा है.
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