
Koderma : सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में जेरियाट्रिक क्लब की बैठक सिविल सर्जन सह अध्यक्ष जेरियाट्रिक क्लब की अध्यक्षता में आयोजित की गई. सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि बुजुर्गावस्था एक सतत, अपरिवर्तनीय और सार्वभौमिक प्रक्रिया है, जिस उम्र में व्यक्ति के उत्पादक योगदान में गिरावट आती है और वह आर्थिक रूप से निर्भर हो जाता है, उसे संभवतः जीवन के वृद्ध चरण की शुरुआत माना जाता है. जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार भारत में लगभग 10 करोड़ बुजुर्ग व्यक्ति हैं जो 2050 में 19 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. औद्योगीकरण, शहरीकरण, तकनीकी परिवर्तन, शिक्षा और वैश्वीकरण के प्रभाव में भारतीय समाज तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है नतीजतन पारंपरिक मूल्य और संस्थाएं क्षरण की प्रक्रिया में हैं, जिसके परिणाम स्वरूप अंतर-पीढ़ीगत संबंध कमजोर हुए हैं जो भारतीय पारंपरिक परिवार की पहचान थे. जेरियाटिरिक क्लब के सचिव सह जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. रमण कुमार नें बताया कि वर्तमान समय में बुजुर्गों की आबादी बढ़ने के साथ ही बुजुर्गों के देखभाल की जवाबदेही भी बढ़ी है. बुजुर्गों के देखभाल के लिए सबसे जरूरी है कि आप उनसे पारस्परिक प्यार वाला व्यवहार रखना चाहिए, उनका सम्मान करना चाहिए और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उन्हें हमेशा सक्रिय और फिट रखने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए. उनकी सामाजिक सक्रियता को बढाने में मदद करना चाहिए उन्हें स्वेच्छा से काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. विभिन्न शोध से पता चला है कि जो बुजुर्ग अपने मन और स्वेच्छा से काम करते हैं वो ज्यादा खुश और सेहतमंद रहते हैं. इस अवसर पर क्लब के सदस्य उपाधीक्षक सदर अस्पताल डॉ. मनोज कुमार, नारायण मोदी, सनत कुमार दा, डॉ. प्रभात कुमार, रामनरेश चौधरी, गणेश कुमार दास, राम रतन अवध्या, उपस्थित रहे.
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