
Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने केंद्रीय बजट को घोर निराशावादी बजट बताया है. कहा है इस बजट में कुछ भी नया नहीं है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि भाजपा बजट को लेकर दशक पूरा कर रही है, अमृत वर्ष के बजट को लेकर लोगों में कौतूहल था. प्रचार-प्रसार भी बड़े पैमाने पर किया गया था. मिला क्या ढाक के तीन पात, घोर निराशा हाथ लगी है. बजट में किसी के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है. न जवानों के लिए, न नौजवानों के लिए और न ही किसानों के लिए. न ही मजदूरों के लिए. हां, हम दो हमारे दो वाली सरकार द्वारा जो बजट पेश किया जा रहा था, उसी प्रकार इस वर्ष भी अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुचांने के लिए यह बजट लाया गया है. श्री रंजन ने कहा कि झारखंडवासियों के लिए घोर निराशा वाला बजट है. देश के 40 फीसदी खनिज के हिस्से में झारखंड की भूमिका काफी अहम है. लेकिन, इस बजट में कुछ भी नहीं है.
चुनावी उद्देश्य की मंशा से बनाए गए बजट को जनता ने नकारा: बन्ना
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महीने का 30 हजार कमाने वाले व्यक्ति को भी टैक्स देने के लिए मजबूर किया गया है. ये बेहिसाब मंहगाई का दंश झेल रहे मध्यम वर्गीय परिवारों पर और अत्याचार है. जब देश में लोगों के पास रोजगार नहीं है तब संवेदनहीन सरकार लोगों से कर वसूलने में लगी हुई है जो निंदनीय है. यह बजट देश का बजट नहीं है,इसमें मध्यम वर्गीय परिवारों को, गरीबों और वंचितों के हितों को दरकिनार किया गया है. चुनावी उद्देश्य की मंशा से बनाए गए इस बजट को जनता नकारती है. इस बजट में महिलाओं को किनारे रखा गया है,युवाओं के अरमानों पर पानी फेर दिया गया है.किसानों, मजदूरों और कामगारों के हक और अधिकार को रोंदने वाला बजट है.
बोगस बजट,केवल झुनझुना थमायाः राजेश ठाकुर
झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने केंद्रीय बजट को बोगस बताया है. उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा की बजट पहले की तरह घोषणाओं में अव्वल है, परन्तु क्रियान्वयन मे लक्ष्य से पीछे रहने का इतिहास रहा है और इस बजट में भी यह डर बना हुआ है. उदाहरण स्वरूप पिछले बजट मे 80 लाख पीएम आवास बनाने की घोषणा की गयी थी लेकिन 38 लाख आवास ही बन पाये और दिसंबर 2024 का समय मांगा गया है. 12 हजार किमी सड़क बनाना था लेकिन 5300 किमी सड़कें ही बन पायी है.
उन्होंने कहा की 400 वंदे भारत ट्रेन स्टार्ट करने की घोषणा की गयी थी लेकिन जनवरी तक 8 ट्रेनों को ही चालू किया जा सका. 3.8 करोड़ घर को नल जल से जोडा़ जाना था वह आधे से कम 1.7 करोड़ घरों मे ही नल जल कनेक्ट हो पाया.
राजेश ठाकुर ने कहा कि इनकम टैक्स राहत के मामले में सरकार ने मिडिल क्लास और सैलरीड क्लास को सिर्फ झुनझुना ही थमाया है. इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 80सी मे निवेश पर छूट का प्रावधान है. निवेश को बढ़ावा देने के लिए 80 ‘सी’ में छूट का दायरा बढ़ाया जाना जरूरी है. इससे टैक्स पेयर्स को अतिरिक्त लाभ होता आय का. परन्तु बजट मे कोई ध्यान नही दिया गया. श्री ठाकुर ने कहा कि कैपिटल आऊटले जो 10 लाख करोड़ है बजट में यह तब तक अर्थव्यवस्था की तस्वीर नहीं बदल सकता जब तक निजी सेक्टर के निवेश मे तेजी नही आती. निजी सेक्टर का निवेश अब तक धीमा बना हुआ है. कॉरपोरेट निवेश नहीं कर रहा, ऐसे में बजट फिर एक बार मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह माना जाएगा.
रोजगार और महंगाई पर बजट में कोई विजन नहीं : पूर्णिमा
कांग्रेस विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने आम बजट को युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए निराशाजनक बताया है. कहा कि बजट में केंद्र सरकार का रोजगार और महंगाई पर कोई विजन नहीं है. युवाओं को कैसे काम मिले, देश का माध्यम वर्ग कैसे किचन की परेशानी से बाहर निकले इसपर बजट मौन है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए भी बजट में कुछ खास नहीं है. उद्यमिता विकास की बार बार बात करनेवाली केंद्र सरकार कैसे देश मे दक्ष श्रमिक तैयार हों इसपर कोई बात बजट में नहीं है. उन्होनें आयकर छूट की सीमा बढ़ाये जाने का स्वागत किया है. कहा कि आठ वर्षों के बाद ही सही केंद्र सरकार की नींद मिशन 24 के नाम पर खुली तो.
जनविरोधी और ग़रीब विरोधी है बजटः दीपिका पांडे
महागामा विधायक श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह ने बजट को जनविरोधी और ग़रीब विरोधी बताया है. उन्होंने कहा कि हमेशा की तरह इस बार भी मोदी सरकार ने अमीरों के लिए बजट बनाया. आम बजट पूरी तरह गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी है. सरकार ने फिर इस बार गरीब,मजदूर और किसानों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है. इस बजट में देश के 80 फीसदी आबादी की उपेक्षा की गई है. बजट में कर्ज लेने वाले मध्यम वर्ग को आयकर कोई बड़ी राहत नहीं दी गई. सरकार के इस बजट में बडे सुधार नदारद दिखाई दे रहे हैं. बजट के नाम पर एक बार फिर इस सरकार ने देश को जुमला परोसा है. इस सरकार के पास महंगाई को रोकने के लिए इस बजट में कुछ नहीं है.
उन्होंने कहा कि हर साल 2 करोड़ नौकरी देने वादा करने वाले इस सरकार के पास रोजगार के लिए इस बजट में कुछ नहीं है. क्या हुआ सरकारी भर्ती का, इस बजट में कुछ नहीं है. बजट में मनरेगा का बजट 73000 करोड़ से घटकर 60,000 करोड़ कर दिया गया है, जबकि देश के एक बड़ी आबादी इस पर ही टिकी है.
श्रीमती पांडे ने कहा कि मोदी सरकार को आज भी किसानों से कोई लेना देना नहीं है. सरकार ने इस बजट में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–12954 करोड़ से घटकर 10787 करोड़ कर दिया है. वहीं राष्ट्रीय शिक्षा मिशन–39553 करोड़ से घटकर 38953 करोड़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन–37160 करोड़ से घटकर 36785 करोड़ कर दिया गया है. प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना–10000 करोड़ का बजट घटकर 3365 करोड़ कर दिया गया है.
बजट में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए कुछ नहीं: सतीश केडिया, कांग्रेस नेता
मोदी सरकार के इस अंतिम बजट को चुनावी बजट कहना उचित होगा. क्योंकि मध्यम वर्गीय परिवार का तो सिर्फ आईवॉश किया गया है. मोदी सरकार के बजट ने एक बार फिर पूंजीपतियों की सरकार होने का संकेत दिया है.

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