
Ranchi: झारखंड सरकार ने बजट में महिलाओं के उत्थान और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जेंडर बजटिंग शुरू की थी. 2016-17 में शुरू हुई जेंडर बजटिंग के तहत सरकार महिलाओं के विकास को अधिक तवज्जो दे रही है. लेकिन इसका लाभ महिलाओं, बालिकाओं तक नहीं पहुंच रहा है. सरकार की तरफ से अब सभी विभागों से कहा गया है कि वे पिछले तीन वर्षों में जेंडर बजटिंग को लेकर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा उपलब्ध करायें. इससे यह पता चल पायेगा कि किस विभाग ने महिलाओं के लिए जेंडर बजटिंग में कितनी उपलब्धि हासिल की. सरकार का मानना है कि जेंडर बजटिंग का लाभ एक खास समूह को मिलना चाहिए, पर उसकी प्रगति काफी धीमी है.
चालू वित्तीय वर्ष में 2650 करोड़ का प्रावधान
जेंडर बजटिंग के तहत इस वर्ष 2650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसमें शिक्षा, पोषाहार, बालिका नामांकन दर, आवास, लाइवलीहुड तथा अन्य कंपोनेंट को शामिल किया गया था. शिक्षा के बजट में 20 प्रतिशत तक का आउटले जेंडर बजटिंग में रखा गया था. 2017-18 की तुलना में महिलाओं के उत्थान और बालिकाओं को उच्च शिक्षा देने का बजट बढ़ाया गया, पर इसका प्रभाव चालू वित्तीय वर्ष में 1.38 प्रतिशत कम हो गया. महिलाओं के लिए बजट में 167.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था.
सामान्य और आर्थिक सेवाओं का व्यय लगातार हो रहा अधिक
सरकार की मध्यावधि सर्वेक्षण में यह कहा गया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के क्षेत्र में सरकार के खर्च में 35.47 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है. 2016-17 में इस पर 20.4 फीसदी खर्च किया गया था. वहीं पोषाहार में भी सरकार लगातार अपने बजट के प्रावधानों को बढ़ा रही है. बजट प्रावधानों के अनुसार, सरकार के खर्च करने की प्रक्रिया 2016-17 की 19.5 फीसदी की तुलना में बढ़ा कर 38.2 प्रतिशत हो गयी है.
यहां यह बताते चलें कि सरकार के राजस्व खर्च में सामान्य और आर्थिक सेवाओं के सेक्टर का खर्च लगातार बढ़ रहा है. पहले यह 10.70 फीसदी था, जो पिछले वर्ष बढ़कर 37.8 फीसदी तक पहुंच गया है. अनुसूचित जाति-जनजातियों के लिए भी बजटिंग 24.7 फीसदी से अधिक बढ़ गया है.
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