
Jamshedpur : व्यापारी नेता कमल किशोर अग्रवाल और संदीप मुरारका ने सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के नेताओं की कार्यशैली पर बड़ा सवाल किया है. उन्होंने कहा कि चैंबर पदाधिकारियों की कार्यशैली से तो यह लगता है कि वे समस्या का समाधान नहीं चाहते हैं. उनकी मंशा केवल इतनी है कि समाचार पत्रों एवं अन्य मीडिया में उनकी खबर व तस्वीर छपती रहे.
उन्होंने कहा कि 28 मार्च को रांची में राज्यपाल रमेश बैस एवं उनके प्रधान सचिव नितिन मदन कुलकर्णी से भेंट कर कृषि बाजार समिति शुल्क हटाने की मांग की है, जबकि यह मांग कृषि मंत्री, कृषि सचिव एवं झारखंड स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड से की जानी चाहिए थी. राज्यपाल महोदय से मिलकर भी केवल फोटो खिंचवाई गई और जमशेदपुर एयरपोर्ट के मुद्दे पर बात की, जो टाटा स्टील से संबंधित है.
उन्होंने कहा कि चैंबर के नेताओं की कार्यशैली एक विशेष राजनीतिक दल से प्रभावित होकर काम करती दिख रही है. व्यापारी नेताद्वय ने कहा कि यह देखा जा रहा है कि पिछले कई मुद्दों पर चैंबर के नेतागण खबर और फोटो मीडिया में दी और से बाद में चुप्पी साध ली. पिछले दिनों हुई एक डकैती के घटना में भी इन लोगों ने आनन-फानन में काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन तो कर दिया लेकिन उसका फॉलो अप नहीं किया. बल्कि लोगों को गुमराह किया कि रांची जाकर सक्षम पदाधिकारियों से मिलकर इस विषय में बात करेंगें, लेकिन कुछ नहीं किया. दोनों व्यापारी नेताओं ने यह सवाल किया कि इस संदर्भ में चैंबर के नेता आम व्यापारियों को बताएं कि उस घटना में चैंबर का रोल क्या रहा?
उन्होंने कहा कि बड़ी हसरतों से व्यापारियों ने उन्हें चैंबर की जिम्मेदारी सौंपी थी किन्तु वे लोग केवल दिखावा करते हुए सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए हवा-हवाई की राजनीति करेंगे तो इससे व्यापारियों का भला होने वाला नहीं है.




