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जानें कैसे धनबाद की एक गुमनामी चिट्ठी से लगा 200 करोड़ घोटाले का आरोप, पूर्व मेयर ने कहा- जांच से नहीं घबराता

Ranchi/Dhanbad : धनबाद के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल की रघुवर सरकार से नजदीकी किसी से छिपी नहीं थी. धनबाद के मेयर होने के साथ वो पार्टी में एक अहम किरदार निभा रहे थे. उनके लिए रांची और धनबाद की दूरी काफी कम थी. लेकिन अब उनकी परेशानियां बढ़नेवाली हैं. हेमंत सरकार की तरफ से रघुवर सरकार के जिस पहली हाई प्रोफाइल मामले की जांच एसीबी से हो रही है, उसके केंद्र बिंदु चंद्रशेखर अग्रवाल हैं. आरोप है कि अपने कार्यकाल में उन्होंने सड़क बनाने के नाम पर करीब 200 करोड़ का घोटाला किया. एसीबी ने पीई (Preliminary Enquiry) दर्ज कर ली है. पीई में एसीबी को अनियमितता दिखेगी तो एसीबी सरकार से मामले में एफआइआर दर्ज करने की अनुमति मांगेगी. अगर ऐसा होता है तो चंद्रशेखर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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कैसे मामला पहुंचा एसीबी के पास

झारखंड में सरकार बदलने के बाद सारा खेल शुरू हुआ. जनवरी महीने में धनबाद के पंडित क्लीनिक रोड निवासी राजकुमार ने एफिडेविट कर नगर विकास विभाग को निगम की योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायत की. यहीं से बात आगे बढ़ी. मार्च महीने में शिकायत पर विभाग की तरफ से पांच लोगों की जांच टीम बनायी गयी. टीम नगर विकास विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी एके रतन की अगुवाई में धनबाद पहुंची. टीम में चीफ इंजीनियर एके वासुदेव, नगर विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार सिंह, आरसीडी के कार्यपालक अभियंता अमरेंद्र कुमार साहा शामिल थे.

सबसे पहले टीम शिकायत करनेवाले के पते पर पहुंची, लेकिन वहां उस नाम का कोई भी व्यक्ति नहीं मिला. इसके बाद टीम ने अपनी जांच शुरू की. टीम ने 14वें वित्त आयोग से बनी 45 सड़कों की जांच की. जांच में पाया गया कि 14वें वित्त आयोग योजना से बनी 40 सड़कों में से 27 सड़कों का प्राक्कलन नगर निगम के ही तकनीकी पदधिकारियों ने ही बनाया था. डीपीआर बनाने के एवज में अधिकारियों ने कोई परामर्शी शुल्क नहीं लिया. लेकिन 13 सड़कों के साथ नाली, एलईडी लाइट, पेवर ब्लॉक आदि का प्रावधान होने की वजह से परामर्शी एजेंसी मास एंड व्यॉस से इसकी डीपीआर औऱ डिजाइन परामर्श शुल्क देकर तैयार कराया. इन 13 सड़कों की कुल प्राक्कलित राशि 156.33 करोड़ रुपये थी. लेकिन इन सड़कों की डीपीआर के अवलोकन से पता चला कि किसी भी डीपीआर में डिजाइन संलग्न नहीं है और तकनीकी प्रतिवेदन भी नहीं है. साथ ही सड़क निर्माण में ओवर एस्टीमेट बना कर ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया. डीपीआर बनानेवाली कंपनी मॉस एंड व्यॉस को नगर निगम ने अधिक भुगतान किया. पाया गया कि दो साल पहले बनी सड़क को निगम ने फिर से तोड़ कर बनवाया. वार्ड 3, 9, 17, 26, 27, 31, 32, 39 समेत अन्य वार्डों में सड़क निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत विभाग के पास पहुंची थी.

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चंद्रशेखर अग्रवाल पर गंभीर आरोप

नगर निगम में 14वें वित्त आयोग की राशि से बननेवाली सड़कों को लेकर मेयर जांच के घेरे में हैं. सड़कों के लिए निगम ने परामर्शी से डीपीआर तैयार कराया. आरोप है कि मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल के निर्देश पर पहले से अच्छी स्थिति की पीसीसी सड़कों को ही तोड़ कर प्राक्कलित राशि कई गुना बढ़ा कर फिर से पीसीसी सड़कों का ही निर्माण करा दिया गया. परमर्शी एजेंसी मास एंड व्यॉस को परामर्शी शुल्क के रूप में बढ़े हुए प्राक्कलन के अनुसार मोटी रकम देकर 50 प्रतिशत राशि मेयर द्वारा वसूले जाने के आरोप की भी जांच एसीबी करेगी.

बढ़िया से जांच होः चंद्रशेखर अग्रवाल

इस मामले पर न्यूज विंग ने चंद्रशेखर अग्रवाल से बात की. उन्होंने कहा कि मुझे जांच से किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. जांच बढ़िया से होनी चाहिए. जांच करनेवाली एजेंसी जो भी सहयोग करने को कहेगी, मैं उसके लिए तैयार हूं. उन्होंने यह भी कहा कि जिस परामर्शी एजेंसी के साथ मेरा नाम जोड़ा जा रहा है, वो एजेंसी भी सरकार की तरफ से भेजी गयी थी.

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