
Ranchi : हाल के वर्षों में जहां नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले लोग पेयजल की सुविधा नहीं मिलने से परेशान है. वहीं निगम के आला अधिकारी भी लोगों को पानी की सुविधा देने में रूचि नहीं दिखा रहा है. या यह कहें कि अब बोरिंग के लिए आये आवेदन पर अनुमति देने का अधिकार निगम के जलबोर्ड के पास नहीं है, तो गलत नहीं होगा. दरअसल शुक्रवार को निगम के अधिकार क्षेत्र वाले ऐसे इलाके हैं जहां निगम एक और टैंकर के माध्यम से भी लोगों को पर्याप्त जलापूर्ति नहीं कर पा रहा है, वहीं कोई व्यक्ति निगम कार्यालय में बोरिंग कराने के लिए आवेदन देता भी है, तो वह आवेदन भी जलबोर्ड कार्यालय के किसी फाइल के नीचे दब जाती है.
उप विकास आयुक्त के आवास में बोरिंग करने की अनुमति भी फाइल में
यह स्थिति उस समय और विचित्र हो जाती है, जब यह पता चलता है कि रांची उपविकास आयुक्त के नव निर्माणाधीन आवास में बोरिंग कराने की अनुमति भी गत एक माह से लबिंत है. यह बात किसी और ने नहीं बल्कि गत दिनों रांची सांसद रामटहल चौधरी की अध्यक्षता में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में कई जनप्रतिनिधियों ने कही थी. निगम के जलबोर्ड के अधिकारियों का इस संदर्भ में यह कहना है कि बोरिंग कराने के लिए एऩओसी जारी करने का अधिकार सरकार के आदेश के बाद उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसके लिए सक्षम पदाधिकारियों की अऩुमति दिये जाने का आदेश सरकार ने दिया हुआ है. हालांकि लोगों की समस्या को देखते हुए दिशा की बैठक में अध्यक्ष ने निगम को आवश्यकतानुसार जलापूर्ति हेतु बोरिंग कराने का निर्देश भी दिया था.
इसे भी पढ़ें: फोन में हुआ युवक से प्यार, युवती को बुलाकर दोस्तों के साथ किया गैंगरेप
कांके विधायक ने कहा था, बोरिंग नहीं होने से लोगों को हो रही है परेशानी
उक्त बैठक में कांके विधायक ने अध्यक्ष को बताया था कि बोरिंग कराने के लिए निगम से अनुमति की आवश्यकता होती है. लेकिन वर्तमान में निगम के जलबोर्ड कार्यालय में बोरिंग हेतु बड़ी संख्या में आवेदन लबिंत पड़े हुए है. इन्हें अबतक अनुमति नहीं दी जा रही है. ऐसे में शहर के कई इलाकों में लोगों को पेयजल हेतु कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि उप विकास आयुक्त रांची के नव निर्माणधीन आवास में भी बोरिंग कराने की अनुमति पिछले एक माह से लंबित पड़ी हुई है.
इसे भी पढ़ें: ई-विद्यावाहिनी, ज्ञानसेतु और परिवहन व्यवस्था योजना का रघुवर दास ने किया शुभारंभ
तीन माह से पड़े हैं 21 आवेदन, अऩुमति किसी को नहीं
इस मामले पर निगम के जलबोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि गत 15 फरवरी से 30 मई के दौरान कुल 21 आवेदन निगम को प्राप्त हुए है. हालांकि इसमें से किसी भी आवेदन पर अऩुमति प्रदान नहीं की गयी है. इसके पीछे कारण यह है कि निगम के अधिकारियों के पास अब बोरिंग के लिए आयें आवेदन पर अनुमति देने का अधिकार नहीं रह गया है. केंद्र सरकार के दिशानिर्देश अनुसार अब बोरिंग हेतु एऩओसी जारी करने हेतु सक्षम अधिकारियों को निर्गत किया गया है.
इसे भी पढ़ें: राहुल गांधी जब से चीन से आये हैं, तब से राफेल-राफेल कर रहे हैं: भाजपा
सक्षम अधिकारी ही दे सकते हैं निर्देश
जलबोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देश अऩुसार निगम के अधिकार क्षेत्र वाले हिस्से में बोरिंग कराने की अनुमति केवल सक्षम पदाधिकारियों द्वारा ही दी जाएगी. ऐसे पदाधिकारियों का स्तर केंद्र सरकार ने अपने निर्देश में दिया है. इसमें जहां 5000 लीटर प्रतिदिन होने वाले सेफ और सेमी क्रिटिकल एस्सेमेंट यूनिट तक के बोरिंग का जिम्मा उपायुक्त स्तर के अधिकारी दे सकते हैं. वहीं 5000 लीटर से ज्यादा क्षमता वाले बोरिंग का निर्देश स्टेट ग्राउंड वाटर अथोरिटी या स्टेट नोडल एजेंसी को देने का अधिकार प्राप्त है.




