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चतरा में किसानों को दी गई ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग, कृषि वैज्ञानिक ने कहा- किसानों की बढ़ेगी आमदनी

Chatra: स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र, चतरा के द्वारा सोमवार को जिले के चतरा एवं गिद्धौर प्रखण्ड में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशी, व्याधिनाशी एवं सुक्ष्म पोशक तत्वों का प्रत्यक्षण सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए इंजि. विनोद कुमार पाण्डेय ने कहा कि जनसंख्या के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और क्षेत्रफल के हिसाब से सातवां बड़ा देश. ऐसे में इतनी बड़ी आबादी को अन्न सुरक्षा देना बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसलिए जरूरी है कि पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक और तकनीकी खेती का विस्तार हो. खेती की बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी किसानों को खेती से नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऐसे में ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए की गई प्रिसिजन फार्मिंग देश के किसानों को बेहतर विकल्प दे सकती है. ड्रोन का इस्तेमाल कर किसान लागत में कमी और समय की बचत कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. पारंपरिक तरीके से कीटनाशकों का छिड़काव करने से हेल्थ पर इसका इफेक्ट पड़ता है लेकिन ड्रोन के इस्तेमाल से इससे बचा जा सकता है. केंद्र सरकार एग्रीकल्चर में ड्रोन के इस्तेमाल पर फोकस कर रही है. इसके जरिए सरकार खेती को हाईटेक बनाना चाहती है. सरकार का मानना है कि ड्रोन के इस्तेमाल से किसानों के समय की बचत होगी और लागत में भी कमी आएगी. उन्होनें कहा कि किसान ड्रोन में कीटनाशकों और पोषक तत्त्वों से भरा एक मानवरहित टैंक होता है. ड्रोन में लगभग 5 से 10 किलोग्राम की उच्च क्षमता मौजूद होती है. ड्रोन द्वारा सिर्फ 15 मिनट में करीब एक एकड़ ज़मीन पर 5 से 10 किलोग्राम कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकेगा. इससे समय की बचत होगीए कम मेहनत में छिड़काव समान रूप से किया जाएगा.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ रंजय कुमार सिंह ने कहा कि कृषि ड्रोन खेती के आधुनिक उपकरणों में से एक है. जिसके इस्तेमाल से किसानों को काफी मदद मिल सकती है. ड्रोन से बड़े क्षेत्रफल में महज कुछ मिनटों में कीटनाशकए खाद या दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है. इससे न सिर्फ लागत में कमी आएगीए बल्कि समय की बचत भी होगी. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सही समय पर खेतों में कीट प्रबंधन किया जा सकेगा.  उन्होनें बताया कि कि यह किसानों को परंपरागत खेती से छुटकारा तो दिलाएगा. साथ ही इससे किसानों को समय की भी काफी बचत होगी. श्री सिंह ने कहा कि ड्रोन बहुत कम समय में पूरे खेत में दवा व उर्वरक का छिड़काव कर सकता है. इससे 20 मिनट में 3-5 एकड़ खेत में छिड़काव किया जा सकता है. यानी 10 मिनट में एक एकड़ खेत में आसानी से छिड़काव हो सकता है. इसमें 10 लीटर की टंकी लगी हैए जो एक बार में एक एकड़ में लगी फसलों पर छिड़काव कर सकती है. जितनी बार इसकी टंकी खाली होगीए अपने आप वापस आकर फिर दवा का घोल भर जहां से छोड़ा हैए वहां पहुंच फिर आगे छिड़कने का कार्य करने लगेगा. एक सेंटीमीटर का भी अंतर नहीं आएगा. किसान धूप में कहीं छायादार जगह पर बैठ एक किमी तक अपने खेत में दवा.खाद का छिड़काव कर सकते हैं. इसमें लगने वाले मजदूर की जरूरत नहीं है. दवा छिड़काव से स्वास्थ्य पर पड़नेवाले हानिकारक प्रभाव से बचा जा सकता है. छिड़काव के दौरान खेतों में मौजूद जहरीले जंतुओं से बचा जा सकेगा. सुरक्षा की दृष्टि से इसमें हाइलेवल सेंसर व कैमरे लगे हैं. यह अपने आसपास तार व पेड़ को 25 मीटर पहले ही देख लेता है और उससे बचकर निकल लेता है. इसमें लगा सेंसर खेतों में नमी के साथ पौधों में लगने वाले रोगों को भी पहचान लेगा. साथ ही इसके माध्यम से आप अपने लैंड को भी माप सकते हैं। श्री सिंह ने कहा कि यह प्रत्यक्षण चतरा जिले के सभी प्रखण्डों में किया जायेगा. प्रशिक्षण सह प्रत्यक्षण कार्यक्रत में कृषि विज्ञान केन्द्र, चतरा के उपेन्द्र कुमार सिंह, मो0 जुनैद आलम, अभिशेक घोश, नवल किषोर, अभिजित घोघ, किषोरी कान्त मिश्र, नेपाल ठाकुर, बसंत ठाकुर आदि उपस्थित थे.

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