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कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान संगठनों का भारत बंद आज, पंजाब हरियाणा सहित कई राज्यों में होगा असर

New Delhi : केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है. पंजाब और हरियाणा में किसान काफी पहले से ही इन विधेयकों का विरोध कर रहे थे. उनका तर्क है कि ये विधेयक किसानों के हित में नहीं है. इनसे कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों के हाथ में चला जायेगा. किसानों के इस आंदोलन को अकाली शिरोमणि दल, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां समर्थन दे रहीं है. इस कड़ी में 25 सितंबर का दिन काफी महतत्वपूर्ण है. क्योंकि आज कई संगठनों ने भारत बंद की घोषणा की है.

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किसान संगठन सड़कों पर उतरेंगे, कई दलों का भी समर्थन

इस आंदोलन के तहत पंजाब, हरियाणा दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में किसान संगठन और विपक्षी पार्टियां सड़कों पर उतरेंगे. भारत बंद को अकाली दल, कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है. कृषि विधेयक के खिलाफ चल रहे आंदोलन और भारत बंद का नेतृत्व ऑल इंडिया किसान महासंघ, ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी और भारतीय किसान यूनियन कर रहे हैं. जबकि बंद के समर्थन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, लेफ्ट, टीएमसी, डीएमके, टीआरएस समेत कुल 18 राजनीतिक दलों ने अपनी आवाज़ उठाई है. साथ ही CITU, AITUC, हिन्द मज़दूर सभा समेत कुल दस केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने भी अपना समर्थन बंद को दिया है.

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ट्रेनों का परिचालन ठप हुआ

बता दें कि हरियाणा और पंजाब में किसान संगठनों ने गुरुवार से ही रेल रोको आंदोलन छेड़ रखा है. इसकी वजह से इन राज्यों से होकर गुजरनेवाली ट्रेनों का परिचालन ठप पड़ा है. मालगाड़ियों के परिचालन पर भी असर पड़ा है. यात्री जहां तहां फंसे हुए है. रेलवे ने भी कई ट्रेनों को रद्द कर दिया था. साथ ही कई ट्रेनों के रूट को डायवर्ट किया गया है. किसानों के आंदोलन के मद्द्नजर प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है. हालांकि किसानों पर सख्ती नहीं करने के भी आदेश दिए गए हैं. पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने प्रदर्शनकारियों से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की है. साथ ही आज धारा 144 के उल्लंघन पर कोई FIR दर्ज नहीं होगी.

इधर राजधानी दिल्ली और एनसीआर में किसानों के आंदोलन का प्रभाव पड़ सकता है. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने किसानों के बंद का समर्थन किया है. किसानों की ओर से दिल्ली-एनसीआर बॉर्डर बंद करने की चेतावनी दी गई है. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी किसान संगठनों ने आंदोन करने की बात कही है.

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