
Ranchi : झारखंड के अन्नदाता परेशान हैं. पसीने से सींची गई धान की फसल तैयार है. बेचने के समुचित बाजार नहीं मिल रहा है. अभी तक राज्य के तीन जिलों में सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है. जिन जगहों पर खरीद शुरू हुई है वहां बेचने पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है. इससे किसान दुविधा में हैं.
अभी तक राज्य के सिर्फ तीन जिले गोड्डा, पाकुड़ और साहेबगंज में धान बिक्री का 50 प्रतिशत पैसा 68 किसानों को ही मिल पाया है. इन जिलों में 98 किसानों का भुगतान नहीं हुआ है. 18 जिलों में खरीदी गई धान का आधा भी भुगतान नहीं हो पाया है.
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जिन तीन जिलों में क्रय केंद्र शुरू नहीं हुआ है वहां निबंधित किसानों को धान बेचने का मैसेज भेज तो दिया जा रहा है लेकिन क्रय केंद्र खोला ही नहीं जा रहा है. इस पर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर गोदाम की समस्या है इस कारण केंद्र नहीं खुल रहे हैं. अधिकतर जगहों पर एफसीआई को गोदाम दिया जा रहा है. इस बीच बिचैलियों को किसान धान ना बेचे इसे लेकर कोई विकल्प तैयार नहीं किया गया है. इस कारण किसान 20 रुपए की जगह 11 रुपए प्रति किलो धान की बिक्री कर रहे हैं.
रबी फसल के लिए नहीं हैं पैसे
घान काटने के बाद किसान खाली खेत में रबी फसल की बुआई कर चुके हैं. अधिकतर जगहों पर गेंहू लगायी गई है लेकिन धान का भुगतान समय पर नहीं मिलने के कारण किसानों को फसल बर्बाद होने का डर सताने लगा है. इस डर की वजह से किसान कम दर पर बिचैलियों को अपना धान बेचने को मजबूर हैं. अधिकतर गांवों में बिचैलियों ने क्षमता से अधिक धान संग्रह कर रखा है और सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं. इसे लेकर भी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों व अन्य किसी अधिकारियों की कोई मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है, जबकि जमाखोरी का धंधा खुलेआम चल रहा है।
40 हजार किसानों में से तीन हजार किसान ही धान बेचे हैं
खरीद कार्य के करीब डेढ़ माह गुजरने को हैं और अभी तक महज तीन हजार किसान ही धान बिक्री के लिए सामने आए हैं. करीब 40 हजार किसानों को मैसेज भेजा गया है. किसान बताते हैं कि पिछली बार बेची गई धान का पैसा लगभग एक वर्ष बाद भी पूरा नहीं मिल पाया है. कई किसान अभी भी ब्लॉक के चक्कर लगा रहे हैं.
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