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#Fact Check: जिंदा युवक को कथित रुप से पोस्टमार्टम के लिए भेजने की खबर का सच

Kumar Gaurav

Ranchi:  दो दिन पहले 26 मई को चान्हो में एक युवक की मौत करंट लगने से हो गयी. पोस्टमार्टम के लिए उसे रिम्स लाया गया. पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के परिजन कहने लगे कि एक बार जांच कर लें. शायद वह जिंदा है. तत्काल उसे इमरजेंसी में ले जाया गया. वहां चिकित्सकों ने उसे मृत पाया.

मीडिया में यह खबर अलग-अलग शीर्षक से प्रकाशित हुआ. पर टोन यही था कि जिंदा युवक को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया. राजनीतिक दलों ने भी तत्काल सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया. हमने इस पूरे मामले की पड़ताल की. जिसमें कई तथ्य सामने आय़े.

रांची से प्रकाशित अखबारों में इस घटना को लेकर जो खबर प्रकाशित हुआ, उसमें लिखा गया कि इलाज के दौरान जितेंद्र की मौत हुई. लेकिन डॉक्टरों की रिपोर्ट में उसे डेड घोषित किया गया था. हालांकि इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री के जांच के आदेश के बाद सिविल सर्जन रांची ने एसीएमओ के नेतृत्व में जांच कमेटी बनायी है. जिसकी रिपोर्ट 28 मई की शाम तक सौंप दी जायेगी.

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क्या था मामला

26 वर्षीय जितेंद्र लॉकडाउन के कारण केरल से अपने गांव लौटा था. उसका गांव लोहरदगा जिले के कैरा थाना में पड़ता था. करीब 25 दिन अपने घर में बिना काम के रहा. फिर काम करने के लिये निकला. 25 मई को गांव में शादी थी. 26 मई की सुबह 7.00 बजे वह टेंट खोलने गया था. टेंट खोलने के दौरान वह हाई वोल्टेज तार के संपर्क में आकर झुलस गया. स्थानीय लोग उसे नजदीक के चान्हो सीएचसी ले गये. उस वक्त जितेंद्र बेहोंशी के हालत में था. सुबह के 8 बजे के करीब जांच के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. उस वक्त वह बेहोंश था. चान्हो सीएचसी की प्रभारी डॉक्टर नमिता ने बताया कि जिस वक्त सीएचसी लाया गया, उसकी मौत हो चुकी थी. न तो उसका पल्स चल रहा था, न ही हर्ट बीट. दो बार जांच करने के बाद उसे मृत घोषित किया गया था.

चान्हो थाना के प्रभारी ने बताया कि सीएचसी से सूचना मिली थी. पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया गया था. जिसे हमने फॉरवर्ड कर दिया. दिन के करीब 1.00 बजे पोस्टमार्टम के लिए रिम्स ले जाया गया.

रिम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ तुलसी महतो ने बताया कि दिन के करीब 1.30 बजे जितेंद्र को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स के लाया गया था. उसके परिजन कह रहे थे कि एक बार जांच कर लें. परिजनों के सटिसफैक्शन के लिए हमने शव को रिम्स के इमरजेंसी में भेज दिया था. जहां उसे ब्रॉट डेड घोषित कर दिया गया.

इसी बीच जितेंद्र के परिवार के किसी सदस्य ने मीडिया को कह दिया कि अगर उसे पहले रिम्स लाया जाता, तो उसकी जान बच जाती.

चान्हों सीएचसी की प्रभारी डॉ नमिता ने बताया कि मामले को बेवजह ही तूल दिया जा रहा है. उसे मृत ही लाया गया था. वो जिंदा ही नहीं था, तो उसे इलाज के लिए कैसे रेफर किया जाता. हमने क्लीनिकली एग्जामिन करने के बाद ही उसे मृत घोषित किया था.

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मीडिया ने क्या लिखा

कथित रुप से जिंदा युवक के पोस्टमार्टम में भेजे जाने की खबर को प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से छापी थी.

“प्रभात खबर” ने “करंट लगे युवक को मृत बताकर चान्हों से रिम्स भेजा,  पर चल रही थी सांसे” शीर्षक से खबर प्रकाशित किया. प्रभात खबर में यह खबर लोहरदगा चान्हो डेटलाइन से छपी है. जिसमें बताया गया है कि चान्हो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा था.

दोपहर 1.00 बजे पोस्टमार्टम के डॉक्टरों ने पाया कि युवक के दिल की धड़कन मिल रही थी. जिसके बाद परिजनों को इमरजेंसी ले जाने को कहा. जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर फिर से पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

#Fact Check:जिंदा युवक को कथित रुप से पोस्टमार्टम के लिए भेजने की खबर का सच

प्रभात खबर में छपी खबर दैनिक “हिंदुस्तान” ने “जिंदा मरीज को भेज दिया पोस्टमार्टम हाउस” शीर्षक से खबर छापा. जिसमें लिखा है कि जब पोस्टर्माम के लिए डॉक्टर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि सांसे चल रही हैं.

जिसके बाद उसे इमरजेंसी में भेज दिया गया. पोस्टमार्टम से इमरजेंसी पहुंचते-पहुंचते उसकी मौत हो गयी. जिसमें चान्हों के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया.

दैनिक “हिंदुस्तान” ने “जिंदा मरीज को भेज दिया पोस्टमार्टम हाउस” शीर्षक से खबर छापा
दैनिक “हिंदुस्तान” ने “जिंदा मरीज को भेज दिया पोस्टमार्टम हाउस” शीर्षक से छपी खबर

हिन्दी “दैनिक भास्कर” ने “चान्हों के डॉक्टर ने मृत बता दिया,  पोस्टमार्टम के लिए गये तो सांसे चल रही थीं,  रिम्स में इलाज के दौरान मौत” शीर्षक से खबर छापा. जिसमें लिखा गया है कि चान्हों के डॉक्टरों ने करंट लगने से झुलसे युवक को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया. लेकिन जांच के दौरान उसने दम तोड़ दिया.

हिन्दी “दैनिक भास्कर” ने “चान्हों के डॉक्टर ने मृत बता दिया,  पोस्टमार्टम के लिए गये तो सांसे चल रही थीं,  रिम्स में इलाज के दौरान मौत” शीर्षक से खबर छापा
हिन्दी “दैनिक भास्कर” ने “चान्हों के डॉक्टर ने मृत बता दिया,  पोस्टमार्टम के लिए गये तो सांसे चल रही थीं,  रिम्स में इलाज के दौरान मौत” शीर्षक से छपी खबर

हिन्दी दैनिक “दैनिक जागरण” ने भी अपने अखबार में इस खबर को “जिंदा को मृत घोषित कर दिया, पोस्टमार्टम से पहले खुलासा” शीर्षक से खबर प्रकाशित किया. डॉक्टरों ने जिंदा रहते ही मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया था.

रिम्स में पोस्टमार्टम शुरु होने से पहले डॉक्टरों ने युवक को जिंदा पाया. उसके दिल की धड़कन चल रही थी. जिसके बाद ट्रॉली से उसे इमरजेंसी भेजा गया. जहां इलाज के दौरान कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गयी.

हिन्दी दैनिक “दैनिक जागरण” ने भी अपने अखबार में इस खबर को “जिंदा को मृत घोषित कर दिया, पोस्टमार्टम से पहले खुलासा” शीर्षक से खबर प्रकाशित किया
हिन्दी दैनिक “दैनिक जागरण” अखबार में खबर को “जिंदा को मृत घोषित कर दिया, पोस्टमार्टम से पहले खुलासा” शीर्षक से छापा गया

 

सिविल सर्जन ने बताया कि हमने इसके लिए एसीएमओ के अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी है. आज शाम तक रिर्पोट आ जायेगी. उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

27 मई को जब मीडिया में इस तरह की खबर छपी तो राजनीतिक दल से जुड़े लोगों ने भी सरकार को घेरना शुरु कर दिया. सोशल मीडिया पर ट्विट किये जाने लगे और फेसबुक पर लिखे जाने लगे.

जानिये क्या कहा नेताओं ने

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी मामले को लेकर ट्वीट  किया. उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा ही संगीन मामला है. संभवतः पूरे देश में अपने आप में अनूठा भी. एक जीवित युवक को पोस्टमार्टम के लिए भेज देने से बड़ी चूक भला क्या हो सकती है. समय पर समुचित इलाज होती, तो युवक की जान बचायी जा सकती थी. इस मामले की उच्च न्यायालय के किसी सीटिंग जज के साथ टीम में राज्य से बाहर के ही चिकित्सक हों. प्रदेश की जनता इस अदभुत सिस्टम की सच्चाई से वाकिफ होना चाहती है. इसके अलावा भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार और भाजपा झारखंड और भाजपा के विभिन्न जिलों के ट्वीटर हैंडल से भी ट्वीट किये गये.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि लानत है ऐसे सिस्टम पर माननीय हेमंत सोरेन जी. एक युवक को जिंदा रहते मृत बता दिया. इलाज होता तो शायद वो बच जाता. गरीब आदिवासी युवक जितेंद्र उरांव की मौत नहीं हुई है. उसकी हत्या कर दी है, इस लापरवाह और बेरहम सिस्टम ने. इस ट्राइबल युवक को न्याय दिलायें. मुकदमा करें. दोषियों पर गाज गिरायें.

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2 Comments

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