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रांची के कोचिंग सेंटर लूट कथा-4 : ऊपर से टिपटॉप, अंदर से मोकामा घाट

Rahul Guru

Ranchi : रांची के कोचिंग संस्थानों की लूट कथा का चौथा किस्त कोचिंग संस्थानों की व्यवस्था पर है. प्रति छात्र लाखों रुपये लेने वाले कोचिंग संस्थानों की हालात एक बार जाकर देख लें. भयावह है. बैठने की व्यवस्था तकलीफ देने वाली है. शौचालय की स्थिति खराब.

शायद ही किसी कमरे में हवा आने-जाने की व्यवस्था हो. बेंच-डेस्क ऐसे की 15-20 मिनट बैठने पर बदन में दर्द होने लगे. कुल मिलाकर कोचिंग संस्थानों के क्लास रूम के हालात उस कहावत को चरितार्थ करने वाला है, जो कुछ साल पहले तक बिहार में बहुत फेमस था. वह है “ऊपर से टिपटॉप, अंदर से मोकामा घाट”

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100 करोड़ से अधिक का सलाना कारोबार करने वाले कोचिंग संस्थान सुविधा के नाम पर जो देते हैं, वो बच्चों के लिए सजा ही होता है. कोचिंग संस्थान का क्लास रूम ‘मुर्गी का दरबा’ से ज्यादा कुछ भी नहीं है. फिटजी रांची, गोल इंस्टीट्यूट, बायोम इंस्टीट्यूट, न्यूटन ट्यूटोरियल, चैंप्स स्क्वेयर, ब्रदर्स एकेडमी जैसे कोचिंग संस्थानों में स्टूडेंट्स के बैठने की जो व्यवस्था है, वह असुरक्षित व तकलीफदेह के साथ जानलेवा भी है.

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20 गुणा 20- के कमरे में पढ़ते हैं कम से कम 60 स्टूडेंट्स

रांची के सर्कुलर रोड के हरिओम टावर, जगन्नाथ टावर, क्लब रोड स्थित सिटी सेंटर में 100 से अधिक कोचिंग संस्थान है. सर्कुलर रोड स्थित हरिओम टावर में अकेले 64 कोचिंग संस्थान हैं. यहीं न्यूटन ट्यूटोरियल और फिटजी जैसे बड़े ब्रांड हैं. 90 फीसदी कोचिंग संस्थान किराये की जगहों में चलते हैं. इन कोचिंग संस्थानों के क्लासरूम प्लाईवुड से कुछ इस तरह बने होते हैं, मानों क्लारूम नहीं एक बड़ा सा बंद डब्बा हो.

लगभग सभी कोचिंग संस्थान के क्लासरूम 20 गुणा 20 के बने होते हैं. प्लाइवुड से. यहां लगे एक बेंच पर 3-3 तो कई बार 4-4 स्टूडेंट्स को बैठाया जाता है. बेंच व डेस्क लोहे के फ्रेम पर प्लाई लगा हुआ है. बेंच व डेस्क के बीच की दूरी इतनी कम होती है, को सामान्य व्यक्ति को 15 मिनट में कमर दर्द होने लगता है. इन कमरों के बिजली के पंखों और एसी के सहारे ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जाता है. कमरे में न तो खिड़की होती है ना ही वेंटीलेटर.

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जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग कभी इसकी जांच नहीं करता. क्योंकि सभी शिक्षा माफिया के चंगुल में हैं. जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग से कभी पूछिये, तो कहेंगे कि उन्हें नहीं पता इसे कैसे कंट्रोल करें. असल में वह झूठ बोलते हैं. अपनी अक्षमता को छिपाते हैं. एक कानून है. नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेम वर्क एक्ट. इसके तहत स्पष्ट है कि एक बच्चे को बैठने के लिये कम से कम 8 स्क्वायर फीट की जगह होनी चाहिये.

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आपातकाल में सीढ़ियों में जायेगी जान

आप भूले नहीं होंगे, गुजरात के सूरत शहर का वह दृश्य. 24 मई 2019 का वह दिन. जब जान बचाने के लिये बच्चे बिल्डिंग की खिड़कियों से छलांग लगा रहे थे. दरअसल, पिछले साल सूरत में एक बिल्डिंग में आग लग गयी थी. बिल्डिंग का नाम तक्षशिला आर्केड था. उस बिल्डिंग में कोचिंग संस्थान चलता था. आग लगने के बाद छात्र जब बाहर नहीं निकल पाये, तो खिड़की से छलांग लगाने लगे थे. घटना में 17 छात्रों की जान चली गयी थी. कुछ की मौत कूदने से हुई थी, तो कुछ की दम घुटने से.

रांची के किसी भी कोचिंग संस्थान में आप चले जाएं. इन संस्थानों के आने-जाने वाले रास्ते को भी देख लें. पता चल जायेगा इन कोचिंग संस्थानों के लिये बच्चों की सुरक्षा कितनी महत्पूर्ण है. ये संस्थान एडमिशन, मेंटनेंस, स्टडी मैटेरियल के नाम पर तरह-तरह की फीस तो वसूलते हैं. लेकिन सुविधा और सुरक्षा का कोई ख्याल नहीं रखते हैं. आपात स्थिति में स्टूडेंट्स को तुरंत बाहर निकलना पड़े तो सीढ़ियों पर ही उनकी जान चली जायेगी.

इसे उदाहरण से समझें. सर्कुलर रोड के हरिओम टावर के सातवें फ्लोर में फिटजी और पांचवें फ्लोर में न्यूटन ट्यूटोरियल है. दोनों ही कोचिंग संस्थानों के क्लासरूम पूरी तरह से प्लाईवूड के बने हुए हैं. फिटजी में आने-जाने के लिए दो रास्ते हैं. एक साइड की सीढ़ी और लिफ्ट केवल टिचर्स और मैनेजमेंट के लोगों के लिए है. एक बार में दो सौ से अधिक बच्चे आते-जाते हैं. आपातकाल की स्थिति बनी तो भगमभाग में बच्चों की जान सीढ़ियों में ही चली जायेगी.

इसी तरह न्यूटन ट्यूटोरियल में भी बच्चों के आने जाने का रास्ता एक ही है. सर्कुलर रोड के तिरूपति टावर के चौथे फ्लोर में ब्रदर्स एकेडमी है. यहां तक जाने का रास्ता गलियारे की तरह है. पतली सी सीढ़ियों के सहारे स्टूडेंट्स आना-जाना करते हैं.

प्रशासन के आदेश के ऊपर हैं रांची के कोचिंग संस्थान

करोड़ों कमाने वाले कोचिंग संस्थान किसी की नहीं सुनते. सरकार या प्रशासन की भी नहीं. घमंड इतना ही वह मानते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. सरकारी आदेश को भी नहीं मानते. प्रशासन को भी इस बात का कोई शर्म या हया नहीं कि उनका आदेश नहीं माना जा रहा, तो वह कार्रवाई करें न.

गुजरात की घटना के बाद पूरे देश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे. 28 मई 2019 को जिला प्रशासन ने सभी कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया था. डीसी राय महिमापत रे के निर्देश पर तत्कालीन एसडीओ गरिमा सिंह ने कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया था. निरीक्षण में स्टूडेंट्स की सुरक्षा को लेकर कई तरह की गड़बड़ियां मिली थी. जिला प्रशासन ने सभी संस्थानों को सभी तरह की गड़बड़ियों को दूर करने का निर्देश दिया था. इसके लिये 15 दिन की समय सीमा निर्धारित की थी.

आज भी 28 मई है. पूरे एक साल बीत गये, कोई सुधार नहीं हुआ. एसडीओ गरिमा सिंह का तो तबादला हो गया है. पर, रांची के डीसी आज भी वही राय महिमापत रे हैं. इस खबर को पढ़ने के बाद शायद वह अपने उन निर्देशों को लागू कराने के लिये कुछ कदम उठा लें.

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