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CM के आदेश के बाद भी 5 महीने में तैयार नहीं हुई स्टेडियमों की रिपोर्ट

अब तक कमिटी गठन पर ही हो रहा विमर्श

Ranchi : सीएम और खेल मंत्री हेमंत सोरेन राज्य में खेल और खिलाड़ियों को लेकर लगातार पहल करते रहे हैं. जुलाई में होटवार और मोरहाबादी में स्टेडियमों की हालत से संबंधित एक रिपोर्ट की मांग उन्होंने की थी. इस आधार पर पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद औऱ

युवा कार्य विभाग की ओऱ से एक जांच कमिटी का गठन 17 अगस्त को किया गया. कमिटी को 15 दिनों में स्टेडियमों से संबंधित जरूरी रिपोर्ट देनी थी. पांच महीने बीतने को हैं. चूंकि पहले बनायी गयी कमिटी में एक सदस्य अगस्त महीने में सरकारी सेवा से रिटायर हो गये. तो अब नये सिरे से कमिटी तैयार किये जाने की कागजी प्रक्रिया ही चल रही है.

एक पखवाड़े में तैयार करनी थी रिपोर्ट

26 जुलाई, 2020 को सीएम खेलगांव, होटवार में थे. इस दौरान उन्होंने वहां बनाये गये कोविड-19 वार्ड का निरीक्षण किया था. इसी क्रम में उन्होंने मेगा स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की खेल संरचना की क्वालिटी की जांच का आदेश दिया था. इससे पहले 23 जुलाई को उन्होंने बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में लगाये गये सिंथेटिक ट्रैक की क्वालिटी को भी जांचे जाने को कहा था. इस आदेश के बाद खेल विभाग ने एक

कमिटी बनायी थी. इसमें अध्यक्ष के तौर पर शामिल कला संस्कृति विभाग के विशेष सचिव संजय कुमार अगस्त महीने में रिटायर हो गये. उनके अलावे इसमें झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के चीफ इंजीनियर और एग्जीक्युटिव इंजीनियर, पेयजल विभाग के एक एग्जीक्युटिव इंजीनियर के अलावे सीसीएल के तकनीकी पदाधिकारी को शामिल किया गया था. कमिटी को एक पखवाड़े में रिपोर्ट तैयार कर लेने को कहा गया था.

स्टेडियमों के मेंटेनेंस पर 7 करोड़ का खर्च

होटवार स्थित स्टेडियमों के मेंटेनेंस का जिम्मा जेएसएसपीएस के पास है. 2015-16 से वह इसका संचालन कर रहा है. अब तक उसकी ओर से स्टेडियमों के सिविल मेंटेनेंस कार्यों पर सात करोड़, नौ लाख सत्तासी हजार चार सौ सैंतीस रुपये खर्च किये जा चुके हैं. इसके अलावे मोरहाबादी के फुटबॉल ग्राउंड में खेल विभाग की ओऱ से 6,38,79,104 रुपये का सिंथेटिक ट्रैक बिछाया गया है.

क्या है स्थिति

फिलहाल नये सिरे से कमिटी गठन की प्रक्रिया जारी है. जानकारी के अनुसार नवंबर महीने में फिर से पहल हुई है. अब इसमें पर्यटन विभाग के विशेष सचिव के बजाए खेल निदेशक को समिति प्रमुख के तौर पर जोड़े जाने का प्रयास है. औपचारिक रूप से कमिटी गठित होने के बाद ही स्टेडियमों की जांच शुरू होगी.

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