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पूर्वी सिंहभूम पशुपालन कार्यालय : परिसर के साथ गरीब कल्याण की योजनाओं का हाल भी बेहाल

Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले में पशुपालन विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का हाल बेहाल है. गरीबों को आर्थिक लाभ और स्वरोजगार देने के लिए चल रही योजनाओं को लेने से लोग जितना कतराते हैं, उतना ही बुरी स्थिति जिला पशुपालन कार्यालय की है.  जमशेदपुर के गोलपहाड़ी स्थित पूर्वी सिंहभूम जिला पशुपालन कार्यालय में प्रवेश करते ही जंगल के बीचोंबीच बने किसी भूतिया खंडहर में पहुंच जाने का आहसास होता है. जर्जर हो चुके मेन गेट से अंतर जाने पर एक रास्ते पर चारपहिया वाहनों के टायर के निशान बता रहे थे कि इंसानों का यहां आनाजाना होता है. मुख्य रास्ते के अगल-बगल बड़ी-बड़ी घास उग आयी है. रास्ते के दोनों तरफ बने सरकारी भवन लगभग खंडहर हो चुके हैं और उनपर भी बड़ी-बड़ी घास और बरगद और पीपल के पेड़ उग आये हैं. थोड़ा और आगे बढ़ने पर जिला पशुपालन पदाधिकारी के दफ्तर के आगे बोर्ड लगा हुआ एक चार पहिया वाहन खड़ा दिखा. हम जिला पशुपालन पदाधिकारी के कार्यालय के अंदर घुसे. जिला पशुपालन पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार अपने चैंबर में बैठे थे. हमने परिसर में जो हाल देखा, उसपर सवाल किया. इस पर उनका जवाब था कि मंत्रालय को लिखते-लिखते फाइल अब काफी मोटी हो गई है. हम भी चाहते हैं कि यह पूरा बहुत बड़ा कैंपस खूबसूरत लगे. इसका जीर्णोद्धार हो, लेकिन फंड नहीं है और आदेश भी नहीं है कि खंडहर में तब्दील हो चुके दफ्तरों और पुराने भवनों को तोड़कर नये सिरे से पूरे कैंपस को सजाया और संवारा जाये.

जिले में पशुपालन विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सूकर पालन, मुर्गी पालन, बतख पालन तथा बकरी पालन की योजनाएं चालू वित्तीय वर्ष में चल रही हैं. इसके अलावा इन जानवरों के शेड के लिए भी योजनाएं आती हैं. लेकिन लाभुक इतने गरीब और असंवेदनशील है  कि 90 फीसदी और 50 फीसदी सब्सिडीवाली योजनाओं को भी लेने से कतराते हैं. उन्होंने कहा कि लाभुक 10 परसेंट अंशदान भी जमा नहीं कर पाते. कुछ योजनाओं में 50 फीसदी अंशदान सरकार और 50 फीसदी लाभुक का है. ऐसी योजनाओं का तो और ज्यादा बुरा हाल है. इसके अलावा इन सभी योजनाओं का ग्रामसभा का पारित होना तथा स्थानीय मुखिया अथवा जिला परिषद सदस्य की अनुशंसा भी जरूरी है. इस वजह से से भी मामले लटक जाते हैं. कुल मिला कर लाभुक को योजनाओं में लेने में काफी दौड़-धूप करनी पड़ती है. इस वजह से भी लंबित आवेदनों की संख्या काफी बढ़ जाती है.

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