
Ranchi: झारखंड में पिछली सरकार के कारण राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी के बच्चों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है. दरअसल, तत्कालीन रघुवर सरकार ने कई तरह के प्रयोग किये थे. जिसमें से एक प्रयोग आंगनबाड़ी के माध्यम से पोषाहार बांटने की योजना में भी किया गया था.
तब की रघुवर दास की सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन पहुंचाने का जिम्मा सखी मंडल के जिम्मे सौंप दिया था. जेएसएलपीएस के माध्यम से बनी सखी मंडल को अपने पैसे से लोकल मार्केट से राशन खरीदकर केंद्रों में पहुंचाना था. नवंबर में शुरू हई इस योजना में फरवरी तक राशन पहुंचाया गया. उसके बाद से यह लगभग बंद है.
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सखी मंडल की महिलाओं ने बताया कि पैसा सही समय से नहीं मिल पा रहा. और, समूह दो-तीन महीने तक अपने पैसे लगाकर या उधार समान लेने की स्थिति में नहीं हैं. जिसके कारण फरवरी के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार का वितरण बंद है. आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यरत सेविका सहायिका के प्रतिनिधिमंडल ने पोषाहार नहीं मिलने की शिकायत विभाग के पदाधिकारियों और सरकार से भी की है, पर कोई सकारात्मक फायदा नहीं हुआ.
पिछली सरकार की इस योजना में बदलाव का नतीजा यह हुआ कि आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और 0 से 3 साल तक के बच्चों को मिलने वाला राशन नहीं मिल पा रहा है. वहीं हेमंत सोरेन की सरकार ने इस दिशा में सुधार करने के लिए कोई पहल नहीं की है.
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कल्याण विभाग सखी मंडल को सही समय पर नहीं दे रहा पैसा
तत्कालीन राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी में राशन पहुंचाने का जिम्मा जेएसएलपीएस के माध्यम से बनी सखी मंडल को दे दिया. सभी गांवों में जेएसएलपीएस ने सखी मंडल बनाया है. यह स्वयं सहायता समूह के तौर पर काम करती है. काम मिलने के बाद ये समूह से एकत्रित किये गये पैसे से राशन की खरीददारी करती हैं. उसके बाद पैकेट तैयार कर आंगनबाड़ी में पहुंचाया जाता है. खरीददारी के बाद सखी मंडल के द्वारा बिल बीपीओ के माध्यम से डीपीएम तक जमा किया जाता है. जिसके सत्यापन के बाद ही बिल समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है. जिसके बाद विभाग जेएसएलपीएस को पैसे देता है. जेएसएलपीएस के माध्यम से सखी मंडल की महिलाओं को पैसा पहुंचता है.
लेकिन विभाग ने अब तक सिर्फ एक महीने का ही पैसा जारी किया है. वहीं सखी मंडल की महिलाओं का कहना है कि हम तीन-चार महीने तक अपने पैसे या उधार के माध्यम से राशन की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं. ऐसी स्थिति में पिछले तीन महीनों से आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार की आपूर्ति बंद है.
पहले सीधा सेविका के माध्यम दिया जाता था पोषाहार
आंगनबाड़ी केंद्रों में पहले सेविकाओं के माध्यम से पोषाहार का वितरण किया जाता था. जिसके तहत समाज कल्याण विभाग सीधा सेविकाओं के खाते में पैसा देता था और वे अपने स्तर से खरीददारी कर पोषाहार का वितरण करती थीं. लेकिन तत्कालीन रघुवर दास की सरकार ने महाराष्ट्र और केरल के तर्ज पर पोषाहार का वितरण सेल्फ हेल्प ग्रुप सखी मंडल को सौंप दिया. पिछली सरकार के दौरान पोषाहार पहुंचाने के लिए रेडी टू ईट योजना पर भी विचार किया गया था. पर ऐसा नहीं हुआ. सखी मंडल को यह जिम्मा तो मिला पर यहां की स्वयं सहायता समूह वाली सखी मंडल की महिलाएं महाराष्ट्र और केरल के तरह सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण पोषाहार नहीं पहुंच पा रहा है.
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