
- वीडीपी के अनुपालन में पहले दिखायी थी सबों ने रुचि, अब दिखा रहे उदासीनता
Amit Jha
Ranchi: राजधानी रांची में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित पंचायतों में लोग अब भी आदर्श गांव बनने की बाट जोह रहे हैं. छह साल होने को हैं. एक भी गांव धरातल पर आदर्श ग्राम नहीं बन सका है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार सत्ता में आने के बाद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा की थी. लोगों को लगा था कि सांसद द्वारा गोद लिए जाने वाले गांव जल्दी ही विकास की रफ़्तार पकड़ेंगे. योजना की सफलता से गांवों में विकास की बयार बहने लगेगी.
लेकिन अब भी रांची के 11 गांवों में से एक भी गांव अपनी पहचान नहीं बना सके हैं. वे बस सांसदों के गोद में ही अब तक सिमटे दिख रहे हैं.
कड़िया मुंडा से लेकर संजय सेठ तक ने रांची के गांवों को लिया है गोद
सर्वप्रथम राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी ने 8 नवम्बर, 2011 को नामकुम प्रखंड के बड़ाम गांव को योजना के तहत गोद लिया था.
फिर पूर्व सांसद कडिया मुंडा ने तमाड़ प्रखंड के परासी पंचायत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ली थी. रांची के पूर्व सांसद रामटहल चौधरी ने भी इसी साल नामकुम के ही हहाप पंचायत को गोद लिया था.
योजना के दूसरे चरण में राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने नामकुम प्रखंड के महिलोंग पंचायत को गोद लिया था.
परिमल नाथवानी ने कांके में चुटू, झामुमो के पूर्व सांसद संजीव कुमार ने अनगडा के गुड़ीडीह गांव को योजना के तहत चुना था.
तीसरे चरण में 2016-17 में रामटहल चौधरी ने कांके के मनातू, महेश पोद्दार ने रातू के बाजपुर, परिमल नाथवानी ने अनगडा के बरवादाग, मुख़्तार अब्बास नकवी ने नामकुम के लाली पंचायत को गोद लिया था.
चौथे चरण में रांची सांसद संजय सेठ ने 2019 में रातू प्रखंड के तारूप गांव को योजना के तहत चयनित किया है. इस तरह से रांची में कुल 11 पंचायतों को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया जा चुका है.
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तारूप को छोड़ सभी पंचायतों का वीडीपी है स्वीकृत
योजना के मुताबिक़ ग्रामसभा के जरिये ग्राम विकास योजना बनानी है. इसके तहत ग्रामीण अपने गांव की अहम जरूरतों और सामुदायिक हित से जुड़े आवश्यक कार्यों को वीडीपी में शामिल करायेंगे.
इसके बाद इसे अंततः जिले के उपविकास आयुक्त के पास जाना है. वहां सांसद, डीडीसी और संबंधित विभागीय पदाधिकारियों के बीच इस पर आवश्यक सहमति बनाकर काम आरम्भ करना है.
योजना के तहत एक रुपये का भी आवंटन केंद्र या राज्य सरकार के स्तर से नहीं किया गया है. ऐसे में किसी पंचायत के विकास के लिए जिला स्तर पर संबंधित विभागीय पदाधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर कन्वर्जेन्स के तहत कार्य करना है.
जानकारी के अनुसार अभी तक तारूप पंचायत को छोड़कर अन्य 10 पंचायतों का वीडीपी तैयार हो चुका है और जिला स्तर पर इसके लिए आवश्यक सहमति भी बन चुकी है.
सभी योजनाओं का क्रियान्वयन अभिसरण के माध्यम से
योजना के तहत मॉडल गांव बनाना है. हर सांसद को एक-एक गांव की जिम्मेवारी लेनी है. एक टर्म में तीन गांवों को आदर्श बनाने का लक्ष्य रखा गया.
इसके तहत गांव में शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, बिजली, रोजगार, पेयजल आदि सुविधाएं उपलब्ध करानी है. गांव में सामाजिक व सांस्कृतिक विकास भी करना है. लोगों के लिए पक्का मकान उपलब्ध कराना है.
गुड गवर्नेस, सिंचाई की पूरी व्यवस्था, उन्नत कृषि, गांवों का बेहतर बाजार सुनिश्चित करना है. इसके अलावा भी कई काम बताये गये हैं.
इन सभी कामों के लिए आवश्यक योजनाओं का क्रियान्वयन अभिसरण (कन्वर्जेन्स) के माध्यम से होना है. फिलहाल आदर्श गांव बनाने के लिए राशि की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गयी है.
ऐसे में अभी सांसद कोटे की राशि से ही काम कराने पर सबकी नजर है. दूसरे मद से राशि की व्यवस्था हो जाने पर उससे गांव में विकास के कार्य कराये जायेंगे.
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सांसद आदर्श ग्राम योजना में दिखा बस शुरुआती रुझान
रांची जिले में चयनित सभी सांसद आदर्श ग्राम मामले में प्रारंभिक दौर में सम्बंधित विभागीय पदाधिकारियों ने उत्साह दिखाया.
योजना और ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड सरकार के निर्देशों के अनुरूप सबों ने प्राथमिकता के अनुसार चयनित ग्रामों में वीडीपी में शामिल योजनाओं को पूरा करने में सहमति जतायी.
पर साल दर साल तस्वीर बदलती गयी है. रांची डीडीसी द्वारा जिले के सभी सम्बंधित पदाधिकारियों से योजना के लिए आवश्यक राशि के प्रबंध और उन्हें आरम्भ किये जाने के बारे में पत्राचार का सिलसिला जारी है.
रांची डीडीसी अनन्य मित्तल ने वीडीपी (ग्राम विकास योजना) में चयनित योजनाओं को अपने वार्षिक कार्य योजना में शामिल करने को सम्बंधित विभागीय पदाधिकारियों को पत्र लिखा है.
कहा है कि आवंटन का अभाव हो तो अपने विभाग से आवंटन उपलब्ध कराने हेतु अग्रेतर कार्रवाई करें. इससे सम्बंधित सूचना उन्हें दी जाये.
सभी सम्बंधित विभाग केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत चयनित पंचायतों में अपने विभाग द्वारा की जानेवाली योजनाओं की सूची 18 फ़रवरी तक उपलब्ध करायें.
साथ ही प्राथमिक स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे ताकि उन योजनाओं को वीडीपी में शामिल करते हुए सांझी वेबसाइट में अपलोड अविलम्ब किया जा सके.
चार महीने में दो दर्जन विभागों को पैसे के लिए लिखा गया है पत्र
उप विकास आयुक्त, रांची की ओर से 24 महत्वपूर्ण विभागों को पिछले चार माह में दो बार पत्र लिखकर विभागीय योजनाओं को पूरा करने में सहयोग मांगा गया था.
इसी वर्ष 3 फ़रवरी को भी सम्बंधित विभागों को भी पत्र जारी किया गया था. अब तक किसी विभाग ने इस पर जवाब नहीं दिया है.
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