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#Economy : क्या आपने कहीं यह खबर देखी, मोदी सरकार ने RBI से कर्ज लेने की सीमा 75 हजार करोड़ से बढ़ा कर 2 लाख करोड़ कर ली

Surjit Singh

आपको जरूर पता होगा, मोदी सरकार ने वर्ष 2019 में भारतीय रिजर्व बैंक से 24.8 अरब डॉलर यानी करीब 1.76 लाख करोड़ रुपया लाभांश व सरप्लस पूंजी के तौर पर ले लिया था.

शायद आप यह भी जानते होंगे कि आरबीआइ से सरकार 75 हजार करोड़ रुपया कर्ज ले सकती है.

अगर आर्थिक खबरों में दिलचस्पी है, यह भी पता होगा कि एक अप्रैल 2020 को मोदी सरकार ने आरबीआइ से कर्ज लेने की सीमा को 75 हजार करोड़ से बढ़ा कर 1.20 लाख करोड़ कर दिया था.

इससे भी बड़ा सच तो शायद आप नहीं ही जानते होंगे. वह यह है कि केंद्र सरकार अब आरबीआइ से 2 लाख करोड़ रुपया कर्ज ले सकती है. 20 अप्रैल को बकायदा इस पर फैसला ले लिया गया है.

इस सच से आप जरूर अनभिज्ञ क्योंकि मेन स्ट्रीम मीडिया, खास कर हिन्दी अखबारों व टीवी चैनलों पर या तो यह खबर चली ही नहीं, या चली भी भी बहुत हल्के तरीके से. जिसे आप शायद देख भी नहीं पाये होंगे.

अगर आपको इस पर विश्वास न हो, तो खुद आरबीआइ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं. 20 अप्रैल को जारी प्रेस रिलीज संख्या- 2019-2020/2249 में इसकी पूरी जानकारी है.

आखिर क्यों देश के तमाम संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए, सस्ता क्रूड आयल खऱीद कर अब तक से सबसे महंगा टेक्स के साथ पेट्रोल-डीजल बेचने के बाद भी मोदी सरकार लगातार आरबीआइ को आर्थिक रूप से कमजोर करने पर उतारू है.

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क्यों मोदी सरकार बार-बार आरबीआइ से अधिक से अधिक रकम निकालना चाहती है

क्यों मोदी सरकार बार-बार आरबीआइ से अधिक से अधिक रकम निकालना चाहती है. क्या हम आर्थिक मंदी की सबसे निचली खाई में प्रवेश कर चुके हैं.

क्योंकि बिना किसी योजना के हुई नोटबंदी, गैर नियोजित तरीके से लागू किये गये जीएसटी के कारण देश का जीडीपी लगातार गिर रहा है. बेरोजगारी दर अब तक के सबसे उच्च स्तर पर है. बैंक दिवालिया होने के कगार पर हैं. ऐसे में अगर देश के केंद्रीय बैंक के पास ही पैसे कम होंगे, तब क्या होगा. जब केंद्रीय बैंक का भी खजाना खाली हो जायेगा, तब क्या हालात होंगे. विशेषज्ञों को यह आशंका है कि देश आर्थिक आपातकाल की तरफ बढ़ चला है.

आर्थिक विशेषज्ञों ने तब भी  मोदी सरकार की आलोचना की थी, जब मोदी सरकार ने आरबीआइ के विरोध के बाद भी 1.76 लाख करोड़ रुपये लिये थे. तब कहा गया था कि अगर किसी देश के केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता बरकरार नहीं रहेगी, तब स्थिति खराब होगी. अब तो बात बहुत आगे निकल चुकी है.

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