
Soumitra Roy
आप एक बार फिर क्रोनोलॉजी को समझिए.
16 मार्च 2020 को राहुल गांधी ने संसद में भारत के 50 टॉप डिफॉल्टर्स की जानकारी मांगी थी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके सहायक अनुराग ठाकुर ने जानकारी देने से मना कर दिया था.
साकेत गोखले की RTI के जवाब में RBI ने माना है कि 68 हजार करोड़ से ज्यादा के लोन राईट ऑफ किये गये हैं.
तो क्या वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद और देश को गुमराह किया. झूठ बोला. देश को जिस बात की जानकारी होनी चाहिये थी, उसे संसद में नहीं बताया और सात माह तक छिपाने का काम किया.
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क्यों?
क्या इसकी वजह इस सूची में मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स, जिली, नक्षत्र और बाबा रामदेव की कंपनी रुची सोया जैसी कंपनियों का नाम शामिल होना था?
चोकसी अभी एंटीगुआ का नागरिक है, जबकि उसका भतीजा नीरव मोदी पीएनबी का लोन डकार कर लंदन में रह रहा है.
क्या भारत के 136 करोड़ लोगों को यह पता नहीं होना चाहिए कि इन 50 कर्जदारों ने इलेक्टोरल बांड्स के ज़रिए बीजेपी या किसी दूसरी पार्टी को कितना पैसा दिया ?
7 महीने पहले जो पर्दे के पीछे, लोगों से, देश से, संसद से छिपाकर, झूठ बोलकर जो हुआ, उसे शुद्ध हिंदी में चोरी और दलाली का रिश्ता ही कहा जायेगा.
एक करदाता की मेहनत का पैसा चोरी करेगा, फिर सरकार की तमाम एजेंसियों के सामने से वह देश से भाग जायेगा और कुछ महीने बाद वे बच जाएंगे.
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कल सोशल मीडिया पर लोन माफी के हंगामे में एक बात दब गयी कि आगे और कितने लोन राईट ऑफ होंगे ?
कांग्रेस के समय से लोन डकारकर इस तरह माफी पाने वालों का सिलसिला कब खत्म होगा?
क्या हर सियासी दल अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को लोन खाकर भागने, छिपने और फिर उनके लोन को राईट ऑफ या माफी देता रहेगा?
इसे संगठित लूट कहते हैं. 95% मूर्खों के देश भारत में यह हिन्दू-मुस्लिम की आड़ में होता है. यानी पर्दे पर दंगे, हिंसा, लिंचिंग, विधायकों की शॉपिंग, सरकार गिराने और लॉकडाउन का खेल चलता है और पीछे लोन यह सब होता है.
हम भी इस अपराध में भागीदार हैं, क्योंकि हमने ही सत्ता को यह सब करने की छूट दे दी है.
हमने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है. अपने ही बैंक बैलेंस पर डाका डलवाया है, क्योंकि इस तरह की लोन माफी बैंकों को खोखला कर चुकी है. बैंक डूबेंगे तो हमारा ही पैसा जाएगा.
एक ही रास्ता है. इस लूटमार की व्यवस्था को बदलने की दिशा में बढ़ना.
डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं
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