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#Dhullu तेरे कारण: केके साइडिंग के मजदूरों ने कहा- विधायक को रंगदारी देने में ही चला जाता है पैसा

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Dhanbad: बाघमारा विधानसभा के केके रेलवे साइडिंग में कोयले से पत्थर अलग करने वाले मजदूरों की स्थिति काफी दयनीय है.

292 से ज्यादा मजदूर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. जबकि मजदूरों के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाने वाले मजदूर नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं.

रेलवे साइडिंग में कार्यरत मजदूरों का कहना है कि पहले उनकी स्थिति ठीक-ठाक थी. लगभग 12 हजार रुपये मजदूरी मिल जाया करती थी. लेकिन अब स्थिति बदतर हो गयी है. अब तीन से साढ़े तीन हजार रुपये प्रतिमाह ही मिल पाते हैं.

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मजदूरों ने बताया कि उनकी इस हालत के लिए बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो जिम्मेवार हैं. मजदूरों ने बताया कि विधायक आउटसोर्सिंग कंपनियों से रंगदारी की वसूली करते हैं. और ये आउटसोर्सिंग कंपनियां मजदूरों का पैसा काटकर विधायक को रंगदारी देती हैं.

त्योहार में बच्चों को भी नहीं दे पाये पैसे

केके साइडिंग में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि उन्हें मजदूरी इतनी कम मिल रही है कि दो जून की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है.

मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति है. मजदूरों ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी की राशि भी हमें नहीं मिल पा रही है.
मजदूर गणेश राम ने बताया कि दशहरा जैसे त्योहार में भी हमलोग बच्चे को सौ रुपये नहीं दे पाये. मजदूरी इतनी कम मिलती है कि इससे गुजारा करना मुश्किल हो रहा है.

गणेश राम ने बताया कि वे लगभग तीस वर्षों से यहां मजदूरी का काम कर रहे हैं, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं आयी थी.

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त्रिपक्षीय वार्ता में भी नहीं बनी सहमति

मजदूरों का बकाया वेतन, वेतन कटौती सहित अन्य समस्याओं को लेकर कई बार डुमरा गेस्ट हाउस में त्रिपक्षीय वार्ता हुई. लेकिन बातचीत में ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका. मजदूरों के साथ जब भी वार्ता हुई, उस दौरान कोयले की ट्रांसपोर्टिंग करने वाली कंपनी प्रबंधन के साथ मजदूरों की हॉट टॉक भी हुई.

केके साइडिंग में काम करने वाले मजदूर एसएमएसजेबी कंपनी पर ही पिछले कुछ माह से मनमाने ढंग से वेतन कटौती कर परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं.

चार महीने की मजदूरी मिली तीन हजार रुपये

मजदूर पवन कुमार राय ने बताया कि कंपनी द्वारा चार महीने बाद फिलहाल तीन हजार रुपये की राशि सभी मजदूरों के खाते में जमा करवायी गयी.

तीन महीने का इतना कम पैसा क्यों और कैसे जमा की गयी इसका हिसाब-किताब कंपनी नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि कंपनी हमलोगों की मजदूरी का पैसा काटकर विधायक को रंगदारी देती है.

जो कंपनी विधायक की शर्तों का पालन नहीं करती है, उसे ढुल्लू के गुर्गे परेशान करने का काम करते हैं. फलस्वरूप ऐसी कंपनियों को यहां बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ता है. उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक की रंगबाजी के कारण यहां से कई कंपनियां काम छोड़कर चली गयी.

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आउटसोर्सिंग कंपनी ने बीसीसीएल को ठहराया जिम्मेवार

वहीं मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी के भुगतान की बात पर जब न्यूज विंग ने एसएमएसजेबी परिवहन कंपनी के रवि चावला से बात की. तब वे मजदूरों के कम वेतन भुगतान के लिए बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्म्मेवार ठहराते नजर आये.

उन्होंने बताया कि रेलवे साइडिंग में कोयले का आवंटन बीसीसीएल द्वारा पर्याप्त मात्रा में नहीं दिया जा रहा है. साथ ही 157 मजदूरों को काम पर रखने की सहमति बनी थी पर इस साइडिंग में 292 मजदूर काम करते हैं. ऐसे में जो भी पैसे मिलते हैं, उसको आपस में बांट दिया जाता है.

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