Opinion

आखिर क्यों धनबाद के झरिया में सीएम रघुवर दास के आने से पहले पुलिस ने किया फ्लैग मार्च !

Akshay Kumar Jha

अमूमन किसी क्षेत्र में उपद्रव की आशंका होने पर प्रशासन लोगों के मन से डर निकालने और सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए फ्लैग मार्च कराता है.

लेकिन झारखंड के धनबाद के झरिया में चुनावी रैली से एक दिन पहले 15 अक्टूबर को ऐसा किया गया. इसे क्या समझा जाये.

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राजनीति की भाषा में इसे जनता के विरोध की आशंका और उस विरोध को सत्ता व पुलिस की बदौलत दबाया जाना माना जाता है.
क्या सत्तासीन बीजेपी के मुखिया रघुवर दास को अपने विरोध का इतना डर है कि उन्हें अपने प्रशासन का खौफ लोगों के बीच दिखाना पड़ रहा है.

बुधवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास का धनबाद व उसके आस-पास तीन विधानसभा क्षेत्र में जन आशीर्वाद यात्रा का कार्यक्रम है. निरसा, सिंदरी और झरिया में सभाएं होंगी.

झरिया में सीएम के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जा रहा है. दरअसल, झरिया के लोग सीएम के एक बयान से नाराज हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर हाल में झरिया को खाली करना पड़ेगा. इसी नाराजगी और विरोध का कांग्रेस राजनीतिक माइलेज लेना चाह रही है.

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सीएम के प्रोग्राम से पहले कांग्रेस ने एक मंच बना कर 15 सूत्री मांगों की डिमांड की है. पार्टी की तरफ से पंप्लेट भी बंटे हैं.

बीजेपी को लगता है कि कांग्रेस झरिया में विरोध के इस चिंगारी को भड़का कर बीजेपी की उस इलाके में छवि खराब कर सकती है.

इसी के मद्देनजर धनबाद और झरिया में पुलिस की तरफ से कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले फ्लैग मार्च निकाला गया है. हालांकि पुलिस ने ऐसी किसी बात से इनकार किया है.

रघुवर दास का होता रहा है विरोध

झारखंड में बीजेपी की सरकार के मुखिया का विरोध होता रहा है. पीएम के कार्यक्रम में सीएम के भाषण के दौरान उन्हीं के फेसबुक लाइव पर रघुवर दास के खिलाफ लोगों ने उनके विरोध में जमकर कमेंट किया था.

जैसे ही पीएम मोदी ने बोलना शुरू किया, उस वक्त भी लोगों का कमेंट सीएम की पीएम मोदी से शिकायत ही थी. वहीं सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी रघुवर दास का विरोध देखा जाता रहा है.

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कई लोगों ने फेसबुक वॉल पर सीएम उम्मीदवार के तौर पर सर्वे भी कराया. जिसमें रघुवर दास की फजीहत होते दिखी है.
संथाल के कार्यक्रम में साफ तौर से मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ नारे लगे.

हालांकि उनके साथ मौजूद निशिकांत दुबे के लिए जिंदाबाद के नारे लगे. लोकतंत्र में इस विरोध को स्वीकार भी किया जाता रहा है.

प्रदेश बीजेपी की तरफ से ‘घर-घर रघुवर नारा’ देकर विधानसभा चुनाव में उतरने की बात थी. लेकिन खुद रघुवर दास इस नारे के साथ जनता के बीच नहीं जा पाये.

क्योंकि उनके पार्टी के भीतर से ही इस नारे के खिलाफ आवाज उठी.  इतना ही नहीं भाजपा के ही विधायक, नेता व अधिकांश कार्यकर्ता इस नारे के साथ जनता के बीच जाने पर आपत्ति जतायी. यही कारण है कि मुख्यमंत्री जन आशीर्वाद यात्रा के तहत रैली कर रहे हैं.

बीजेपी के मौजूदा विधायकों ने भी घर-घर रघुवर को धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दिया. सरकार के मंत्री सरयू राय ने तो नारे को सीधा नकार कर दूसरे नारे के साथ अपने जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की. देखने वाली बात होगी कि झरिया और धनबाद में प्रशासन के फ्लैग मार्च के बाद फायदा बीजेपी को होता है या इसका माइलेज कांग्रेस को मिल जाएगा.

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