
Dhanbad: झारखंड आंदोलन के पुरोधा व धनबाद के पूर्व सांसद एके राय को उनकी 87वीं जयंती पर गुरुवार को उन्हें याद किया गया. मार्क्सवादी समन्वय समिति के पुराना बाजार, टेंपल रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में एक सादे समाराेह में कार्यकर्ताओं ने उनकी जयंती को संघर्ष दिवस के रूप में मनाया. इस मौके पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने स्वनिर्भरता, जनक्रांति व समाजवाद के रास्ते पर चलते हुए बिरसा से लेनिन तक का सफर तय करने का संकल्प लिया. वक्ताओं ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बने 23 साल हो चुका ह. इतने वर्षों में झारखंड झगड़ाखंड और लूटखंड में तब्दील हो चुका है. ए,के, राय ने पहले ही कहा था कि बिना समाजवादी विचार के सही झारखंड नहीं बन सकता है. वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की स्थापना कर यहां के दबे-कुचले लोगों को स्वनिर्भर बनाने का सपना एके राय ने ही देखा था.
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शोषित, पीड़ित, आदिवासियों और मजदूरों की आवाज थे एके राय : अंबुज मंडल
टेंपल रोड कार्यालय के अलावा बीसीकेयू के सभी कोलियरी व क्षेत्रीय कार्यालयों व मासस के सभी कार्यालयों में भी ए.के. राय की जयंती संघर्ष दिवस के रूप में मनाई गई. सिंदरी में मार्क्सवादी समन्वय समिति सिन्दरी ने कामरेड ए के राय के जन्म दिवस को ” संघर्ष दिवस ” के रूप मे पीडीआईएल के मुख्य द्वार के गोलाम्वर पर उनके तस्वीर पर पुष्प चढाकर कर लाल सलाम अर्पित किया गया. ” जव तक सूरज चांद रहेगा, राय साहब आपका नाम रहेगा” के नारे लगाए गए. अम्बुज कुमार मंडल ने अपने वक्तव्य में कहा कि ” कामरेड ए. के. राय का जीवन का एक ही मकसद था. शोषितों, पीड़ितों,आदिवासियों और मजदूरों के हक लिए संघर्षशील रहना. ” वहीं सुरेश प्रसाद ने कहा कि ” राय साहब हक और अधिकार को प्राप्त करने के लिए संघर्ष को ही एक मात्र रास्ता चुने और बताया कि वामपंथी ताकत ही दक्षिणपंथी ताकत को परास्त कर सकता है. विकास कुमार ठाकुर ने कहा कि “मजदूरो के हक के लिए संघर्ष को गला लगाना होगा.
इस कार्यक्रम में हरि प्रसाद पप्पू, पवन महतो सुभाष चटर्जी, बिंदा पासवान, सुभाष सिंह, राणा चटराज, सुभाष मुर्मू, नरेश पासवान, भूषण महतो, विजय चौधरी, रामलाल दा, धर्म बाउरी, राजेश बिरूआ, हरेंद्र निषाद, राजकुमार रवानी, नितेश महतो, अखिलेश महतो, करण पासवान, सुनील सिंह, भगवान पासवान, सुरेश सिंह समेत अन्य तथा सिंदरी में महालाल हासदा, सहदेव सिंह, विरिचि महतो,नयन दत्ता, गौतम प्रसाद,नुनूलाल टुडू, विमल रवानी, दिपक वनर्जी, रोहित महतो, दिपू होरो, अमर सिंह, दशरथ ठाकुर समेत अन्य थे.




