
Ranchi: झारखंड सरकार में कार्यरत फोर्थ ग्रेड के कर्मियों के वेतनमान बढ़ाने के साथ-साथ लिपिक घोषित करने पर अब तक फैसला नहीं लिया जा सका है. हालात यह है कि अब तो झारखंड विधानसभा की आश्वासन समिति के निर्देश पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. आश्वासन समिति की बैठकों में भी सरकारी अफसर कुछ ठोस आश्वासन नहीं दे पाते. दरअसल, फोर्थ ग्रेड कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सालों से सरकार से फरियाद कर रहे हैं. कहीं, सुनवाई होती न देख विधानसभा में यह मामला उठा था जिसके बाद इसे सदन की आश्वासन समिति को ट्रांसफर कर दिया गया. समिति भी इस मामले को अपने स्तर से देख रही है.
विधानसभा की आश्वासन समिति ने भी कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा था और चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के वेतनमान घोषित करने के विषय पर विभागीय बैठक में भाग लेने का अनुरोध किया है लेकिन अक्सर देखा जा रहा है कि बैठक हो रही है पर सरकार के वरीय अफसर इसमें रूची नहीं ले रहे हैं. दरअसल, चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को प्रथम एसीपी वेतनमान पे बैंड ,गे्रड पे- पीएन 4000-6000, 5200-20200, 2400 लागू करने की मांग की जा रही है.
पूर्व मुख्य सचिव ने भी दी थी अपनी सहमति
राज्य के पूर्व मुख्य सचिव आरएस शर्मा ने भी इनके वेतनमान देने पर अपनी सहमति दी थी, इसके बाद कार्मिक विभाग व वित्त विभाग भी सहमत था लेकिन 13-14 वर्ष से यह मामला फंसा हुआ है. कई बार सचिवालय में प्रदर्शन हुआ, कर्मचारी सूचना के अधिकार का भी उपयोग कर फाइलों से संबंधित जानकारी हासिल की लेकिन अभी तक उनके वेतनमान व लिपिक में प्रमोशन पर कोई निर्णय नहीं हो सका है. हालांकि सरकार का कहना है कि प्रमोशन के लिए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा देना जरूरी है जबकि कर्मियों का कहना है कि फोर्थ ग्रेड कर्मियों में अधिकांश उतने पढ़े-लिखे नहीं है, वहीं छठे वेतनमान में भी सीमित प्रतियोतिा परीक्षा लेने की बाध्यता नहीं रखी गयी है ऐसे में सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार कर निर्णय लेना चाहिए.




