न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

झारखंड में नवजात बच्चों की मृत्यु दर में आयी कमी, सालाना 17500 नवजात की होती है मृत्यु

राज्य भर में यूनिसेफ मना रहा है नवजात सप्ताह-समय पूर्व जन्म, जीवन एवं विकास

136

Ranchi: यूनिसेफ की तरफ से झारखंड में नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर नवजात सप्ताह-जन्म, जीवन और विकास मनाया जा रहा है. यूनिसेफ के आंकड़ों के हिसाब से झारखंड में नवजात बच्चों की मृत्यु का प्रतिशत लगातार कम हो रहा है. एसआरएस-2016 के नतीजों के अनुसार, झारखंड में प्रत्येक वर्ष 17500 नवजात बच्चों की मृत्यु होती है. भारत में कुल जन्मे बच्चों में से एक चौथाई प्रतिशत नवजात शिशुओं की मृत्यु जन्म लेने के पहले दिन ही हो जाती है.

इसे भी पढ़ेंःन्यूज विंग ब्रेकिंग: झारखंड में फाइनांशियल क्राइसिस! ट्रेजरी में सिर्फ 200 करोड़, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं की देनदारी महीनों से बंद

झारखंड में अनुमानित तौर पर पांच वर्ष या इससे कम उम्र के दो तिहाई बच्चे मौत का शिकार हो जाते हैं. समय पूर्व जन्म लेनेवाले बच्चों की संख्या मरनेवाले बच्चों में 35 फीसदी हैं. संक्रमण की वजह से 31 प्रतिशत और सांस लेने में दिक्कत होने से 20 फीसदी नवजात मृत्यु के शिकार होते हैं. यूनिसेफ की तरफ से इन्हीं कारणों को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है.

जागरुकता से आयेगी मृत्यु दर में कमी

21 नवंबर तक नवजात सप्ताह के दौरान गर्भवती माताओं और अन्य को इस संबंध में जानकारी दी जायेगी. यूनिसेफ के अनुसार कुशल देखभाल और समय पूर्व उपचार से नवजात बच्चों की मौत रोकी जा सकती है. समुचित देखभाल से 41 फीसदी नवजात बच्चों को बचाया जा सकता है. इसके अलावा छोटी बीमारियों से 30 प्रतिशत बच्चों को बचाया जा सकता है. यूनिसेफ की झारखंड प्रमुख डॉ मधुलिका जोनाथन के अनुसार, नवजातों के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए मल्टीसेक्टोरल दृष्टिकोण का होना जरूरी है. यह घरों पर सहिया और एएनएम के माध्यम से नवजात बच्चों की आवश्यक देखभाल सुनिश्चित कर पायेगा.

SMILE

इसे भी पढ़ेंःएक लाख करोड़ के ऑन गोईंग प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी, आपूर्तिकर्ताओं…

इसके अलावा मदर केयर जैसे महत्वपूर्ण हस्तक्षेप, जन्म के एक घंटे के अंदर आवश्यक देखभाल और पोषण, बीमार नवजात बच्चों की पहचान करना तथा कार्यरत कंगारू मदरकेयर केंद्रों में विशेष देखभाल की व्यवस्था जरूरी है. विशेष नवजात केंद्रों में बच्चों को रेफर कर भी मृत्यु को कम किया जा सकता है.

डॉ जोनाथन के अनुसार 2011 से लेकर अब तक झारखंड में छह हजार नवजात बच्चों को सामुदायिक, घर आधारित नवजात देखभाल तथा सुविधा आधारित देखभाल के तरीकों से बचाया गया है. राज्य भर के जिला अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में 18 विशेष नवजात नैटेल केयर यूनिट स्थापित किये गये हैं. इस वर्ष अप्रैल से लेकर अक्तूबर 2018 तक 4000 नवजात बच्चों को इन केंद्रों में भरती कराया गया, जिनमें से 60 फीसदी को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गयी.

इसे भी पढ़ें- गिरफ्तार पारा शिक्षक भेजे गए जेल, लगी आठ संगीन धाराएं, रांची के बाद दूसरे जिलों के पारा शिक्षक भी…

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: