
Ranchi: राज्य भर में ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं जो किसी कारण से अधूरे पड़े हैं. इस संबंध में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने भी चिंता जताते उन्हें पूरा कराने का निर्देश JRERA (झारखंड भू- संपदा नियामक प्राधिकार) को दिया है. मंत्रालय के मुताबिक अधूरे प्रोजेक्ट में अल्प एवं मध्यम आय वर्गीय क्रेताओं का पैसा लगा हुआ रहता है. मकान, फ्लैट नहीं मिलने के कारण वित्तीय संस्थाओं से लिए गए लोन की पुनर्अदायगी का भार उन पर पड़ता है. साथ ही वर्तमान में वे जिस भवन में किराया देकर रहते हैं, उसका भी क्रेताओं पर दोहरा बोझ पड़ता है.
बताएं कैसे चाहिए मदद
JRERA के विशेष कार्य पदाधिकारी के स्तर से सूचना जारी करते कहा गया है कि झारखंड में भी कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो अधूरे पड़े हैं. इसके लिए संबंधित प्रोजेक्ट के प्रमोटर या बिल्डर डिटेल जानकारी के साथ JRERA को बताएं. इसके लिए नवंबर के दूसरे सप्ताह तक समय निर्धारित किया गया है. इस अवधि में वे बताएं कि आखिर किन कारणों से उनका प्रोजेक्ट अधूरा है. प्रोजेक्ट को पूरा करने को उन्हें किस प्रकार की सहायता चाहिए, इससे संबंधित प्रस्ताव भी वे JRERA को दे सकते हैं.




