
Ranchi : पश्चिमी सिंहभूम में निजी खदान बंद होने से राज्य के अन्य जिलों में उद्योगों की स्थिति गंभीर हो गयी है. इसमें कई ऐसे उद्योग है जो अब लौह अयस्क या अन्य कच्चा माल की कमी के कारण बंदी के कागार पर है. चैंबर ऑफ कॉर्मस के खनन उप समिति की मानें तो पश्चिमी सिंहभूम जिले का पूरा आर्थिक तंत्र खनिज उद्योग पर निर्भर है. लेकिन यहां के उद्योग बंद की स्थिति में है. मार्च 2020 में जब निजी खदानें बंद हुई उससे पहले हर महीने लगभग 1 लाख टन लौह अयस्क की ढुलाई होती थी. निजी खदानों के बंद होने से काम भी बंद हो गया है. जानकारी हो कि पिछले दिनों व्यापारियों ने इस मामले में बैठक की थी. जिसमें खनन से जुड़े व्यापारियेां ने बताया कि राज्य के अधिकांश जिलों में पश्चिमी सिंहभूम के लौ अयस्क से उद्योग चलते है. जबकि राज्य में अधिकांश उद्योग लौ अयस्क पर निर्भर है.
अन्य राज्यों में जाता है अयस्क
झारखंड के लौह अयस्क की मांग अन्य राज्यों में है. इसमें पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्य भी है. जहां के उद्योग प्लांटों में लौह अयस्क की जरूरत होती है. इसके आलावा झारखंड के जमशेदपुर, रामगढ़, हजारीबाग, गिरिडीह में पश्चिम बंगाल से अयस्क की डिमांड की जाती है. ऐसे में खदानें बदं होने से उद्योगों के सामने संकट है. व्यापारियों की मानें तो इससे रोजगार पर भी असर पड़ रहा है. जिसमें जिले के लगभग 50 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है. खदानों के बंद होने का असर क्रशर उद्योग पर भी पडा है. अयस्क नहीं मिलने के कारण कई क्रशर प्लांट भी बंद की स्थिति में पहुंच गये हैं. चैंबर ऑफ कॉर्मस की मानें तो मामले की जानकारी उद्योग और खनन सचिव को दी जायेगी.
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