BusinessJamshedpurJharkhand

Jamshedpur : इंकैब मामले में एनसीएलटी में हुई सुनवाई, वेदांता के रेज्यूलूशन प्लान को संज्ञान में लेने का आदेश

Jamshedpur : शहर के इंकैब कंपनी के मामले में एनसीएलटी कोलकाता के हरिश्चंद्र सुरी और रोहित कपूर के बेंच में बुधवार को सुनवाई हुई. इस दौरान सभी पक्षों के अधिवक्ताओं का तर्क सुनने के बाद बेंच ने 30 दिनों के लिए रेज्यूलूशन प्रोसेस बढ़ाने की अनुमति दी. साथ ही वेदांता की ओर से दिये गये रेज्यूलूशन प्लान को संज्ञान में लेने का आदेश दिया गया.

इससे पहले आरपी पंकज टिबरेवाल ने कहा कि वेदांता की ओर से दी गयी रेज्यूलूशन प्लान का कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स संज्ञान ले रही है. ऐसे में इंसोल्वेंसी रेज्यूलूशन की प्रक्रिया का समय तीस दिनों के लिए बढ़ाया जाये. आरपी के वकील ने बेंच को बताया कि उन्होंने बेंच में रेज्यूलूशन प्रस्तुत किया है. जिसे 97 फीसदी कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स का समर्थन प्राप्त है. इससे कंपनी का पुनरूद्धार हो जायेगा. इस परिस्थिति में उसकी सुनवाई कर उसे स्वीकृत किया जाये. सभी पक्ष के अधिवक्ताओं का कहना था कि जब सीओसी का गठन ही गैर कानूनी ढंग से किया गया था, तो सीओसी रेजोल्यूशन प्लान कैसे पास कर सकती है. फिर सबों का पक्ष सुनने के बाद बेंच ने तीस दिनों के लिए रेजोल्यूशन प्रोसेस बढ़ाने की अनुमति देते हुये वेदांता के रेज्यूलूशन प्लान को संज्ञान में लेने को कहा. साथ ही भगवती सिंह के आवेदन के अलावा अन्य सभी आवेदनों की अगली सुनवाई के लिए 27 जून 2022 की तारीख मुकर्रर की गयी है. सुनवाई के दौरान कंपनी के कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता आकाश शर्मा ने हिस्सा लिया.

यह है मामला
मालूम हो कि नये आरपी पंकज टिबरेवाल पर भी उसी फर्जीवाड़े का आरोप है, जो शशि अग्रवाल पर था. इसके अलावा आइआरपी पर जमशेदपुर और पुणे की जमीन की मालिकाना और अद्यतन स्थिति के साथ भी फर्जीवाड़ा का मामला भी सामने आया था. साथ ही रमेश घमंडीराम गोवानी द्वारा इंकैब कंपनी के लूटे गये लगभग तीन सौ करोड़ का कोई हिसाब नहीं देकर उन्हीं कंपनियों की कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स बनायी गयी. इस कारण एनसीएलएटी ने 7 फरवरी 2020 के लिक्विडेशन आदेश को निरस्त करते हुए शशि अग्रवाल को हटाया और आईबीबीआई से शशि अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके आरपी बनने की अर्हता को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. ज्ञातव्य यह भी है कि पंकज टिबरेवाल रमेश घमंडी राम के साथ मिलकर फिर से लगभग चार हजार करोड़ की फर्जी लेनदारी स्वीकार कर फर्जी लेनदारों की कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स बनायी है ताकि कंपनी को लिक्विडेट करा कर कमला मिल्स, पेगागस, ट्रापिकल वेंचर्स आदि फर्जी लेनदारों द्वारा कंपनी की तीन हजार करोड़ की परिसंपत्तियों की लूट का मार्ग प्रशस्त किया जा सके.

ये भी पढ़ें- JHARKHAND SPORTS : पश्चिमी सिंहभूम ने रांची को 13 रनों से किया पराजित

Related Articles

Back to top button