
Sunil Singh
Ranchi: इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग का मामला उलझने की संभावना है. इस बार इंडिया फोल्डर में माले भी शामिल है. इसलिए माले को भी सीट देना है. झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी सीट में कटौती नहीं करेगा. झमुमो चाहता है कि कांग्रेस व राजद अपने कोटे से माले को सीट दें. यहां बता दें कि 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो, कांग्रेस व राजद के बीच सीटों का जो बंटवारा हुआ था उसके अनुसार झामुमो-43, कांग्रेस 31 व राजद ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इस बार कांग्रेस 33 व राजद 22 सीटों की मांग कर रहा है. लेकिन झामुमो अपनी सीट कम करने को तैयार नहीं है, बल्कि व 45 सीट पर दावा कर रहा है.
झामुमो चाहता है कि माले को कांग्रेस व राजद अपनी तय सीटों में कटौती कर माले को दें. मासस का माले में विलय के बाद माले की दावेदारी चार सीटों पर हो गई है. माले बगोदर, राजधनवार. निरसा व सिंदरी की सीट मांग रही है. इन चारों सीटों पर माले अन्य दलों के मुकाबले मजबूत है. यहां इसका जनाधार है. निरसा व सिंदरी की सीट पर विलय के पहले मासस लड़ता था. यहां से मासस के उम्मीदवार जीतते रहे हैं.
झामुमो के दबाव के कारण कांग्रेस व राजद को सीटों में कटौती करनी पड़ेगी. राजद भले ही 22 सीटों की मांग कर रहा है. लेकिन झामुमो इस बाद पांच सीट ही देने को तैयार है. राजद के खाते में पलामू की हुसैनाबाद, विश्रामपुर, छतरपुर, चतरा, देवघर व गोड्डा की सीट जा सकती है. हालांकि राजद पांच सीटों पर मान जाएगा यह कहना अभी कठिन है क्योंकि यदि उसे अधिक सीटें नहीं मिली तो वह कम से कम 7 सीट तो जरूर चाहेगा. राजद इस बार अपने हक के लिए विद्रोह करने तक को तैयार है. राजद नेताओं ने अपनी भावना से राजद सप्रीमो लालू यादव व तेजस्वी यादव को अवगत करा दिया है. प्रदेश राजद अध्यक्ष संजय यादव सहित अन्य नेताओं ने राजद उम्मीदवारों की सूची भी दी है. तेजस्वी ने भरोसा दिया है कि वह सीट शेयरिंग में अन्याय नहीं होने देंगे. राजद को हक मिलेगा. बैठक होगी तो वह अपनी बात रखेंगे.
इधर, कांग्रेस भी पूर्व की तरह 31 सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. कांग्रेस भी सीटें कम करने को फिलहाल तैयार नहीं है. उसका कहना है कि अधिक सीट नहीं मिलेगी तो पहले से तय सीट में कमी भी नहीं होने दी जाएगी. लेकिन झामुमो का दबाव सीट कम करने को लेकर है. इस हाल में बीच का क्या रास्ता निकलता है यह देखना होगा. क्योंकि झामुमो कांग्रेस के दबाव में नहीं अएगा. हरियाणा में कांग्रेस को मिली हार के बाद वह दवाब में है. कांग्रेस की हैसियत नहीं है कि वह झामुमो पर दबाव डाल सके. झामुमो की शर्तों के समक्ष उसका झुकना पड़ेगा.
इस बार झामुमो व कांग्रेस के बीच कुछ सीटों की अदलाबदली जरूर होगी. जो दल जहां मजबूत होगा वहां से चुनाव लड़ेगा. इस बात पर दोनों दलों में सहमति बन गई है. मांडू, खूंटी, पोड़ेयाहाट, भवनाथपुर जैसे कई सीटें हैं यहां अदलाबदली की संभावना है. पिछले पांच सालों में राजनीतिक समीकरण बदला है. सीटों की अदलाबदली पर बातचीत चल रही है.




