Ranchi

16 मार्च को विराट धर्मसभा को पुरी पीठ के शंकराचार्य श्री स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज करेंगे संबोधित

Ranchi: शंकराचार्य परंपरा में पूर्व दिशा में स्थापित गोवर्धन मठ, पुरी पीठ के वर्तमान शंकराचार्य श्री स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज 16 मार्च 2023 को आगमन भगवान बिरसा मुंडा जी के पावन भूमि रांची, झारखंड में सुबह 8 बजे पूज्य शंकराचार्य जी रांची रेलवे स्टेशन पर होगा. उसके उपरांत संध्या 4 बजे से हरमू मैदान में विराट धर्मसभा को पूज्य शंकराचार्य जी संबोधित करेंगे जिसमें पूरे झारखंड से 20000 भक्तजन सम्मिलित होंगे. विराट धर्मसभा के समापन के बाद 20000 भक्तजनों के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी. आपको बता दें की जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ,पुरी पीठ के 145वें शंकराचार्य हैं.

4 दिनों का होगा प्रवास

पूज्य शंकराचार्य जी का प्रवास रांची में 4 दिनों का है. इन 4 दिनों में प्रथम दिन विराट धर्मसभा का आयोजन हरमू मैदान में है. 2 दिन दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा और एक दिन शाम में श्री जगन्नाथ मंदिर, रांची में संगोष्ठी का आयोजन होगा. शंकराचार्य जी 19 मार्च 2023 को संध्या 4 बजे हटिया रेलवे स्टेशन से पुरी, उड़ीसा के लिए प्रस्थान करेंगे.

देश के प्रमुख संस्थानों में संबोधन

आदित्य वाहिनी झारखंड के संयोजक शिशिर ठाकुर का कहना है कि पूज्य शंकराचार्य जी साल में 250 से अधिक दिनों तक भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में राष्ट्र, धर्म, वैदिक गणित, विज्ञान को लेकर आम जनमानस को संबोधित करते हैं. उनका कहना है कि पूज्य शंकराचार्य जी का ऐतिहासिक संभाषण IIM अहमदाबाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय , IIT कानपुर, IIT BHU, DRDO चेन्नई, AIIMS दिल्ली, IIM कोलकाता, NIAS,IISc बेंगलुरु जैसे स्थानों पर हो चुका है.

जय जगन्नाथ जी, वैदिक सनातन धर्म की पुनर्स्थापना करने वाले महान दार्शनिक भगवत्पाद आदि शंकराचार्य जी ईसवी सन से ५०७ वर्ष पूर्व भगवान शिव शंकराचार्य के रुप में भारत के केरल क्षेत्र में उत्पन्न हुऐ । वायुपुराण में , शिव पुराण में शंकराचार्य को शिव का ही अवतार माना गया है । कुल बत्तीस वर्ष की आयु उन्हें प्राप्त थी । बत्तीस वर्ष की आयु की सीमा में उन्होंने अनेकों भाष्य लिखे। आदि शंकराचार्य जी ने विधान किया कि उनके द्वारा स्थापित 4 पीठों के पीठाधीश्वर उनके प्रतिभूति समझे जावेंगे। चार पीठों में शंकराचार्यों की परम्परा अनवरत चली आ रही है। हिन्दु धर्म के संरक्षण और उन्नयन में चारों पीठ की भूमिका महत्वपूर्ण है। आज भी शंकराचार्य जी की पीठ राष्ट्रीय एकता की वैजयन्ती फहरा रही है। आदि शंकराचार्य जी सनातन धर्म की विश्व व्यापी महानता के उदार प्रवक्ता थे। उन्होंने वैदिक धर्म को अनंत युगों का स्थायित्व देकर उसे अत्यंत सुदृढ़ नींव प्रदान किया। हिन्दु धर्म का दर्शन चिरस्थायी है और सम्पूर्ण विश्व के लिये मंगलकारी है.

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