
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर कोरोना वायरस को शुरुआती स्तर पर रोकने में विफल रहने को लेकर हमले तेज कर दिए हैं. उनका कहना है कि इसके कारण दुनिया के 184 देश ‘नर्क जैसी स्थिति’ से गुजर रहे हैं.
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इसी बीच अमेरिकी सांसदों ने मांग की है कि निर्माण और खनिज के लिए चीन के ऊपर निर्भरता कम की जाए.
ट्रंप लगातार कोरोना वायरस के प्रकोप के लिए सार्वजनिक स्तर पर चीन को दोषी ठहरा रहे हैं और इस संबंध में उन्होंने जांच भी शुरू की है. उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि वह जर्मनी द्वारा क्षति के लिए चीन से मांगे गए 140 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा मुआवजे के बारे में सोच रहे हैं.
चीन में कोरोना को रोका जाना चाहिये था- ट्रंप
अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं का मानना है कि अगर चीन शुरुआती स्तर पर इस वायरस को लेकर जानकारियां साझा करता तो वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था की हालत इतनी बुरी नहीं होती और इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जानें नहीं जाती.
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ यह 184 देशों में है. जैसा कि आप मुझे यह कहते हुए प्राय: सुन सकते हैं कि इस पर विश्वास करना मुश्किल है. यह समझ से परे है. इसे स्रोत पर ही रोका जा सकता था, जो कि चीन में था. इसे वहीं रोका जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ. और अब 184 देश नर्क से गुजर रहे हैं.’’
पिछले साल मध्य नवंबर में यह वायरस चीन से उभरा था और अब तक पूरी दुनिया में दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत इसकी वजह से हो चुकी है. सबसे ज्यादा 59,000 लोगों की मौत अमेरिका में हुई है.
अमेरिका में इसके व्यापक प्रकोप की वजह से ट्रंप पर लगातार अमेरिकी सांसद यह दबाव डाल रहे हैं कि बीजिंग पर अमेरिका की निर्भरता कम की जाए. उन्होंने चीन से मुआवजा मांगे जाने की बात भी कही है.
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चीन ने वायरस पर लगाम लगाने के अमेरिका के प्रयासों को खारिज किया
इधर अमेरिका के उप विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि चीन ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में मदद के लिए इस संक्रामक रोग के केंद्र रहे वुहान में विशेषज्ञों को भेजने की अमेरिका की कोशिशों को खारिज कर दिया है.
पोम्पिओ ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति और उनके प्रशासन ने अमेरिकियों को चीन में जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए भेजने के वास्ते पूरी लगन के साथ काम किया ताकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी वहां जाने की कोशिश में मदद की जाए. हमें इनकार कर दिया गया.’
उन्होंने कहा, ‘चीन सरकार यह होने नहीं देगा, निश्चित तौर पर यह पारदर्शिता के विपरीत है. उन्होंने अमेरिकी पत्रकारों को बाहर निकाल दिया और उस समय वहां अमेरिकियों तथा अन्य पश्चिमी वैज्ञानिकों को भेजने से इनकार कर दिया है जब स्थिति बहुत गंभीर थी.’
बता दें कि अमेरिकी अधिकारी चीन की यात्रा करने वाले डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ प्रतिनिधि दल का हिस्सा थे. विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, ‘वहां पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल कई स्थानों पर समूहों में गया लेकिन वुहान जाने वाले लोगों में अमेरिकी शामिल नहीं थे.’
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