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कोरोना से जंग : मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष पैकेज की योजना

Bhopal : मध्य प्रदेश सरकार कोविड-19 संकट के मद्देनजर प्रदेश में ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने हेतु ऑक्सीजन उत्पादन क्षेत्र में नवीन निवेश को आकर्षित करने के उद्देश से विशेष पैकेज देने की योजना बना रही है. यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को दी.

मध्य प्रदेश उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला ने बताया, ‘‘हम मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एक विशेष पैकेज देने की योजना बना रहे हैं. इसके लिए हमने मसौदा नीति तैयार कर ली है.’’

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में नवीन स्थापित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम अथवा वृहद श्रेणी की वे इकाइयां एवं मध्य प्रदेश की सीमा में स्थापित विद्यमान पात्र इकाई द्वारा स्थापित क्षमता में विस्तार अथवा अन्य क्षेत्रों की विद्यमान औद्योगिक इकाई इसके पात्र होंगे, जो ऑक्सीजन उत्पादन, ऑक्सीजन सिलेंडर निर्माता/फेब्रिकेटर इकाई, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उत्पादक इकाई एवं अन्य सबंधित उपकरण जो ऑक्सीजन उत्पादन में उपयोग में आता है, शामिल हों.

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शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में नवीन या पूर्व से स्थापित एवं संचालित मेडिकल कॉलेज, अस्पताल एवं नर्सिंग होम द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन/ ऑक्सीजन सिलेंडर निर्माता इकाई की स्थापना करने पर विशिष्ट पैकेज में प्रावधानित सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे.

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उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन उत्पादन इकाइयों के लिए यह विशेष पैकेज अंतर्गत प्रावधानित सुविधाओं को प्राप्त करने की पात्रता उन्हीं इकाइयों को होगी, जिनकी उत्पादन क्षमता न्यूनतम 10 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा ऑक्सीजन उत्पादन की होगी.

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शुक्ला ने बताया कि पैकेज के तहत पात्र इकाई द्वारा यंत्र एवं संयंत्र तथा भवन (भूमि एवं रिहायशी इकाइयों को छोड़कर) में किये गये पूंजी निवेश पर 50 प्रतिशत की स्थिर दर से मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता देय होगी, लेकिन इस सहायता की अधिकतम सीमा 75 करोड़ रुपये होगी.

उन्होंने कहा कि पात्र इकाई द्वारा सुरक्षा मानकों यथा अग्नि शमन उपकरणों में किये गये व्यय का 50 प्रतिशत, अधिकतम एक करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति प्रदान की जावेगी.

शुक्ला ने बताया कि इसके अलावा, पात्र इकाइयों को प्रचलित विद्युत टैरिफ पर एक रुपये प्रति यूनिट की छूट प्रदान की जावेगी. यह छूट मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा दी जा रही छूट, यदि कोई हो, के अतिरिक्त एक रुपये प्रति यूनिट होगी. इस सुविधा का लाभ वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के दिन से तीन वर्षों की अवधि हेतु प्राप्त हो सकेगा.

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