
Jamshedpur: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ के नशा मुक्ति केंद्र का एक चौंकाने वाला खुलासा आया है. केजीएमयू की रिपोर्ट के अनुसार 30 फीसदी लोगों ने वर्कफ्रॉम होम के दौरान सिगरेट से किनारा कर लिया है. माना जा रहा है कि इसमें सबसे अधिक सहायक परिवार का दबाव रहा. धूम्रपान करना इतनी बुरी आदत है कि यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लंग्स कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकती है. धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए लोग काफी मेहनत करते हैं, लेकिन छोड़ नहीं पाते हैं.
स्मोकिंग छोड़ने वालों को प्रेरित करने के लिए 9 मार्च को ‘नो स्मोकिंग डे’ मनाया जाता है. केजीएमयू के प्रोफेसर सूर्यकांत के अनुसार कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोग कई बार ग्रुप में स्मोकिंग करते हैं. कई लोग दूसरों को देखकर सिगरेट पीने लगते हैं. घर पर रहने के दौरान दोनों ही चीजें नहीं होती. इसके साथ ही कई लोगों ने बताया कि घर में पत्नी और बच्चों के सामने सिगरेट नहीं पीते. इसी प्रकार ये लोग अपने इलाके की दुकान पर खड़े होकर भी सिगरेट नहीं पीते हैं. ऐसे में लंबे समय तक वर्कफ्रॉम होम के दौरान सिगरेट से दूर हो गए. अच्छी बात यह रही कि इसमें से अधिकतर लोग ऑफिस खुलने के बाद भी सिगरेट से दूरी बनाए रखी.
जाने नो स्मोकिंग डे के बारे में
नो स्मोकिंग डे को पहली बार साल 1984 में रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में मनाया गया. इसे एश वेडनेस्डे के दिन मनाया गया था, ताकि लोगों को स्मोकिंग के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जा सके और स्मोकिंग छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा सके. हालांकि बाद में इसे हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को मनाने का फैसला किया गया.
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