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कृषि योग्य भूमि से किसानों को बेदखल कर रही हैं कंपनियां, 2004 से नहीं काटा जा रहा है लगान

pravin/chhaya

Ranchi: लड़ेंगे, जीतेंगे, लोकसभा न राज्यसभा सबसे उंची ग्रामसभा, किसानों का शोषणा बंद करो, वन विभाग गरीब किसानों को जमीन से बेदखल करना बंद करे… आदि गगनभेद नारों का उदघोष करते हुए, 167200 कदमो से दूरी तय कर हजारीबाग के किसान राजभवन के समक्ष पहुंचे. हजारीबाग से यह यात्रा 20 फरवरी को निकली थी. ठंड, बारिश और खुले असमान के नीचे सात रात गुजारने के बाद भी चेहरे में थकान नहीं. आखिर कृषि पर निर्भर जिनकी आजीविका है, ये समूह राजभवन रांची के समक्ष अपने अस्तित्व, पहचान और आजीविका को बचाने के लिए राज्यपाल से गुहार लगाने पहुंचे थे. पदयात्रा में शमिल किसान एक ओर प्रशासन के द्वारा जमीन की रसीद नहीं कटने से अक्रोशित हैं, वही दूसरी ओर किसानों पर कंपनीयों का चाबुक चल रहा है. किसानों की जमीन हड़पी जा रही है. जिसकी फरीयाद भी जिला में कोई अधिकारी सुन नही रहे. किसानों की वजूद मिटाने में वन विभाग भी पीछे नही है. वन पट्टा का आवेदन रद्द कर जिस भूमि पर किसाना सालों से खेती कर रहे थे, उस पर सीमांकन कर परंपरागत वन आश्रित परिवार एवं आदिवासी परिवारों को बेदखल करना शुरू कर दिया गया है.

क्या कहते हैं पदयात्रा में शामिल किसान

टाटो, कटकमसंडी की ऑलीन एक्का कहती हैं, 2006 से अंचल के द्वारा हमारी जमीन का रसीद नहीं काटा जा रहा है. जिससे जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र बनाने में परेशानी हो रही है. ऐसे में अभिभावक बच्चों को  शिक्षा-दीक्षा भी सही रूप से नहीं दिला पा रहे हैं. अंचल में जमीन की रसीद क्यों नही कट रही है, ये पूछने पर अधिकारी कहते हैं जमीन का खतियान लाओ. हमलोग रांची से विस्थापित हैं. सौ साल पहले हमारे पूर्वज हजारीबाग में बसे थे. और उस जमीन की बंदोबस्ती सरकार ने भी की है. ऐसे में हमलोग खतियान कहां से लाये, यह तो सरकार ही बतायेगी. मेरे गांव में 170 आदिवासी परिवारों का लगान रसीद नही कट रहा है.

वन विभाग हमारे खेतों पर कब्जा कर रहा है

जांगो पंचायत गांव, सरिया प्रखंड चुरचू की सोहरी देवी कहती हैं, वन विभाग हमारे खेतों पर कब्जा कर रहा है. वन विभाग हम लोगों को बेघर करने पर तुला हुआ है. जिस सागवान के वृक्ष की रखवाली की, जंगल बनाये,  आज वन विभाग उस पर अपना पोल लगा रहा है. मेरे गांव के 150 वन आश्रित परिवार के समक्ष बेघर होने का खतरा मडंरा रहा है. हम 100 किलोमीटर की दूरी तय कर राज्यपाल से अपनी फरियाद करने आये हैं. देखते हैं गरीबो की फरियाद कोई सुनता है कि नही.

किसानों को जबरन पैसा देकर लूटी जा रही है जमीन

शिवलालपुर हजारीबाग के गोपाल प्रसाद कहते हैं, किसान जिस जमीन पर खेती कर रहे हैं उस जमीन को सरकार द्वारा छीना जा रहा है. गांव में दलाल बनाये जा रहे हैं. किसानों को जबरन पैसा देकर जमीन लूटी जा रही है. जो लोग अपनी जमीन नहीं छोड़ना नहीं चाहते उसकी जमीन के चारो ओर गढ़ा खोदकर कोयला निकालने का खेल कंपनी कर रही है. कंपनी किसानों को प्रताडित कर रही है. इसमें प्रशासन भी पूंजीपतियों का ही साथ दे रहा है. आज हम लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं. सरकार किसानों की जमीन छीनने के लिए बड़कागांव में गोली कांड को अंजाम देती है. किसानों की ओर से मुकदमा किये जाने पर भी सुनवाई नहीं हो रही है. और न ही कोई कार्रवाई हुई.

नेशनल अलायंस फॉर पीस एंड जस्टिस के संस्थापक रहे वीरेंद्र कुमार कहते हैं

आज के दौर में सरकार के द्वारा प्राकृतिक संसाधनों को पूंजीपतियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है. न्यायालय आदिवासियों, किसानों, एससी समुदाय पर हो रहे अन्याय कों नही देख पा रहा है. ऐसे में सड़क पर उतरने के सिवा कोई अन्य विकल्प नही है. बड़कागांव में 25 सौ एकड़ फॉरेस्ट लैंड गैरकानूनी ढंग से एनटीपीसी को दे दी गयी है. राज्य में ग्रामसभा के अधिकारों का राज्य में अनुपालन नहीं हो रहा है. राज्यपाल महोदया से हमलोग आज मिलकर सभी वस्तु स्थिती से अवगत कराये. राज्यपाल महोदय को बताया गया कि फारेस्ट राइट एक्ट के बारे में सरकार को जानकारी नहीं है. अधिकारी कानून का उल्लंघन करते हैं. उन्होंने बताया कि अधिकारियों पर कार्रवाई करने का राज्यपाल ने आश्वासन दिया. साथ ही कहा कि अधिकारियों के खिलाफ सबूत दीजिए. जिससे उन पर कार्रवाई की जा सके. उन्होंने कहा कि राज्यपाल से मिल कर कुछ संतष्टि हुई है. कार्रवाई होने के बाद ही सब स्पष्ट होगा.

क्या है पदयात्रा में शामिल किसानों की मांग

ये हैं प्रमुख मांगे: जनजातीय अधिकारों और कल्याण कानूनों के लिए जनजातीय विभाग का गठन, सर्वोच्च न्यायालय के वन अधिकार अधिनियम के खिलाफ जंगलों से वनवासियों को बाहर करने का आदेश को सरकार अध्यादेश लाकर रोकें, वन आवास समुदायों के खिलाफ जितने मामले हैं, उन्हें वापस लिया जाये. पेसा एक्ट को केंद्रीय कानून के अंतर्गत दिये गये प्रावधानों के अनुरूप अधिसूचित किया जाये, सीएनटी एसपीटी कड़ाई से लागू किया जाये, सामुदायिक जमीन को भूमि बैक से मुक्त किया जाये आदि.

किसानों को इन संगठनों का मिला समर्थन

आदिवासी छात्र मोर्चा, आदिवासी एकता मंच, दामिन आदिम जनजातिय कल्याण केंद्र, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा,  केंद्रीय सरना समिति, केंद्रीय आदिवासी मोर्चा समेत अन्य संगठनों का समर्थन मिला.

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