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महागठबंधन पर संकट के बादल, प्रदेश अध्यक्ष नहीं होने से कांग्रेस कार्यकर्ता हतोत्साहित

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Ranchi :  लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी राज्य की सभी विपक्षी पार्टियां (कांग्रेस, जेएमएम, जेवीएम, आरजेडी, वामदल) महागठबंधन बनाकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाह रही हैं. लेकिन हकीकत यह है कि इनकी स्थिति ऐसी नहीं दिख रही कि वे बीजेपी के खिलाफ मजबूत गठबंधऩ बना सके.

दरअसल विधानसभा चुनाव को अब तीन माह से भी कम समय बचा है. लेकिन सभी दलों की जो स्थिति बनी है, उसे देख यही कहा जा सकता है कि महागठंधन बनने में अभी संकट के बादल छाये हैं.

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जेएमएम अभी तक इसी आस में है कि कब कांग्रेस का आंतरिक मामला सुलझे और पार्टी महागठबंधन की बात प्रदेश अध्य़क्ष से करे. कांग्रेस अभी भी उहापोह की स्थिति में है कि इतने कम समय में पार्टी की चुनावी नैया कैसे पार होगी.

जेवीएम, आरजेडी, वामदलों की स्थिति तो ऐसी है कि लगता ही नहीं वे चुनाव लड़ने के मूड में हैं. हालांकि इस बीच चर्चा है कि राजीव गांधी की 75वीं जयंती के दौरान कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह रांची आने वाले है. संभवतः इसके पहले कांग्रेस अध्य़क्ष के नाम पर मुहर लग जायेगी. ऐसे में यह सवाल बड़ा है कि महागठबंधन के घटक दलों के रवैये को देखकर ही सीएम रघुवर दास ने दावा तो नहीं किया है- अबकी बार, 65 पार.

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विपक्षी दलों के आपसी मतभेद पर सीएम की नजर

बता दें कि सीएम ने पीएम मोदी की विकास की राजनीति को प्रमुखता से रख दावा किया था कि लोग हमें पूर्ण बहुमत दे रहे हैं. विकास की ठोस आधारशिला के कारण बीजेपी कार्यकर्ता चुनावों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. विधानसभा चुनाव में भी हम विशाल बहुमत से जीतेंगे.

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देखा जाये तो उनके इस बयान के पीछे महागठबंधन की स्थिति कम जिम्मेवार नहीं है. सभी घटक दलों के बीच जो विश्वास की कमी है, उसे सीएम दास अच्छी तरह जानते हैं. विपक्षी दलों की इसी स्थिति को देख सीएम ने दावा किया है कि बीजेपी इसबार विधानसभा चुनाव में 65 + सीटें जीतेगी.

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कांग्रेस कार्यकर्ता स्वीकार करने लगे अपनी पराजय

महागठबंधन में कांग्रेस की स्थिति तो अभी सबसे ज्यादा खराब है. कांग्रेस अध्य़क्ष डॉ अजय कुमार और वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय के साथ हुए मतभेद पर तो पार्टी दो फाड़ हो चुकी है. डॉ अजय ने तो अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उसके बाद की जो स्थिति पार्टी में देखने को मिली है, उससे पार्टी कार्यकर्ता अभी तक बाहर नहीं हो सके है.

हालांकि नये प्रदेश अध्य़क्ष का मामला दिल्ली दरबार में है. खबर है कि अगले एक दो दिन में नये अध्य़क्ष पर पार्टी निर्णय ले लेगी. यह कयास इसलिए भी जोरों पर है कि प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती पर रांची आने वाले है. इसके बावजूद कार्यकर्ता चुनाव में कम समय बची देख पराजय के मोड में है. कार्यकर्ता जानते हैं कि महागठबंधन में रहते सीट बंटवारों पर पेच अभी बाकी है. अगर कोई पेच बनता है कि तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ कभी भी अधिक सीटों पर जीत सुनिश्चित नहीं कर पायेगी.

अपने बलबूते भी चुनाव लड़ने के मोड में जेएमएम

घटक दलों विशेषकर कांग्रेस की स्थिति देख महागठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभाने जा रही जेएमएम अब अपनी कोशिश पर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है. पिछले कई दिनों से पार्टी नेता चुनावी मोड में है. युवा आक्रोश रैली की की बात करें या प्रस्तावित बदलाव रैली की, सभी कार्यक्रमों का संकेत यही है कि पार्टी अपने बलबूते भी चुनाव लड़ सकती है.

बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जेएमएम के लिए जो स्थिति देखी गयी थी, उससे पार्टी के कई विधायक खुश नहीं हैं. बहरागोड़ा विधायक तो पहले ही कांग्रेस से महागठबंधऩ नहीं करते की बात कह चुके हैं. न्यूज विंग ने पहले ही सूत्रों के हवाले से कहा है कि घटक दलों की स्थिति देख पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन सरकार बनाने से ज्यादा अपने वर्तमान सीटों को बचाने की ही कोशिश में ज्यादा दिख रहे हैं.

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