
Gyan Ranjan
Ranchi : नये साल में झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर गाज गिर सकती है. तीन मंत्रियों के बदले जाने की सूचना मिल रही है. आलाकमान लगातार सरकार में शामिल चारों मंत्रियों के कार्यों का आकलन कर रहा है. बताया जा रहा है कि आलाकमान के समक्ष पार्टी पदाधिकारियों के साथ साथ जिला स्तर के नेताओं ने मंत्रियों की शिकायत की है. सभी पक्षों पर मंथन हुआ है. जानकारी के अनुसार आलाकमान अब सरकार में युवा चेहरे को जगह देने का मन बनाये हुए है. आधी आबादी को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो रहा है.
प्रदेश प्रभारी सक्रिय, कई वरीय नेताओं से की है मंत्रणा
इस संबंध में अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए दल के विधायकों समेत संगठनात्मक स्तर पर मिली शिकायतों को भी ध्यान रखा जायेगा. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय इसे लेकर सक्रिय हैं. उन्होंने इस संबंध में प्रदेश के कई वरीय नेताओं संग मंत्रणा की है. अलग-अलग स्तर पर मिले फीडबैक का आकलन करने के बाद आलाकमान को वे इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट सौंपेंगे. हालांकि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में फेरबदल की यह कवायद कुछ समय पूर्व से ही चल रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा समेत कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण यह टल रहा था. अब इस पर अंतिम फैसला शीघ्र होगा. निर्णय लेने के पहले प्रदेश के वरीय नेताओं के सुझावों को प्राथमिकता दी जायेगी.
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महिला कोटे से दीपिका और पूर्णिमा आगे
कांग्रेस अभी इस पर मंथन कर रही है कि नये चेहरे के तौर पर किन्हें यह अवसर दिया जा सकता है. यह तय माना जा रहा है कि जब भी किसी तरह का परिवर्तन होगा तो कांग्रेस महिला को स्थान जरूर देगी. मंत्रिमंडल में कांग्रेस कोटे से अब तक किसी महिला चेहरे को आगे नहीं किया गया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह और महगामा विधायक दीपिका पाण्डेय को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है, उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है. पूर्णिमा और दीपिका की पहचान एक प्रखर वक्ता के रूप में है. सदन में भी दोनों विधायकों ने अपनी छाप छोड़ी है साथ ही इनमें से किसी के मंत्री बनने पर पार्टी जातिगत समीकरण भी साध लेगी.
मंत्री हमारी नहीं सुनते, घिरे रहते हैं
कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की यह शिकायत है कि पार्टी कोटे से शामिल मंत्री उनकी सुनते नहीं हैं. वे चुनिंदा लोगों से घिरे रहते हैं. जिलों के दौरे के क्रम में प्रदेश प्रभारी को इससे संबंधित सबसे ज्यादा नाराजगी देखने को मिली है. पार्टी के संवाद कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने खुल कर अपनी भड़ास निकाली है. इसके अलावा विधायकों ने भी शिकायत की है कि उनके क्षेत्र में भ्रमण और कार्यक्रम तय होने के बावजूद उन्हें मंत्री सूचित नहीं करते. हजारीबाग जिले के एक विधायक ने हाल ही में एक मंत्री की शिकायत ऊपर तक पहुंचाई है. उन्होंने कहा कि मंत्री ने उनके घर के बगल में चाय पी और उन्हें सूचित तक नहीं किया.
कई वजह है मंत्रियों के बदले जाने की
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय ने कार्यभार संभालने के बाद निर्देश दिया था कि कांग्रेस कोटे के मंत्री प्रदेश कार्यालय में जनसुनवाई करेंगे. वे इस दौरान आमलोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनकर समाधान करेंगे. आरंभ में मंत्रियों ने जनसुनवाई की, लेकिन यह जल्द ही बंद हो गया. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के निर्देश पर मंत्रियों को छह-छह जिलों का प्रभार दिया गया था. मंत्रियों ने शुरू में जिलों के दौरे किए, लेकिन बाद में यह ठप हो गया. मंत्री आलमगीर आलम को साहिबगंज, गोड्डा, बोकारो, पाकुड़, हजारीबाग और गिरिडीह, डा. रामेश्वर उरांव को खूंटी, सिमडेगा, गुमला, रामगढ़, लोहरदगा और पलामू, बन्ना गुप्ता को धनबाद, जमशेदपुर, सरायकेला, रांची, चतरा और कोडरमा एवं बादल को चाईबासा, गढ़वा, देवघर, दुमका, जामताड़ा और लातेहार की जिम्मेदारी दी गई थी.
क्यों लग रहा है फैसला लेने में वक्त
कांग्रेस किसी फैसले पर पहुंचने से पहले इस बात पर भी फोकस कर रही है कि पार्टी इस फैसले से मजबूत हो. अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए दल के विधायकों समेत संगठनात्मक स्तर पर मिली शिकायतों पर भी चर्चा की जा रही है. कांग्रेस लंबे समय से झारखंड की राजनीति में प्रयोग करने का मन बना रही है. राहुल इस वक्त भारत जोड़ो यात्रा पर हैं यही वजह है कि पार्टी को लेकर अहम बैठकों में वह शामिल नहीं हो पा रहे. मल्लिकार्जुन खड़गे एक चर्चा के बाद ही फैसले लेने के पक्ष में हैं.
क्या कहते हैं प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर
काम का आकलन होना चाहिए, मंत्री, विधायकों के कार्य का आकलन एक सतत प्रक्रिया है. मैं तो कहता हूं कि प्रदेश अध्यक्ष के भी काम का आकलन होना चाहिए. ये सब काम पार्टी करती रहती है. जहां तक मंत्रियों के बदले जाने की बात है तो फिलहाल यह मेरी जानकारी में नहीं है. हां, अगर आलाकमान इस तरह का निर्णय लेता है ये समझ लीजिये आकलन का ही परिणाम है.
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