
Ranchi: ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नल कनेक्शन के जरिये पानी दिये जाने की स्कीम चलायी जा रही है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से इसके लिये जल जीवन मिशन योजना झारखंड में 2019 से संचालित है. पिछले दिनों जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2019-20 में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की स्कीम की बदहाली पर चिंता जतायी है.
मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरान राज्य में 10.13 लाख परिवारों को इसका लाभ दिये जाने का टारगेट था. पर इसकी तुलना में केवल 98,000 (9.67%) परिवारों को ही नल कनेक्शन दिया जा सका है. ऐसे में 2024 तक सभी गांवों में हर परिवार को नल कनेक्शन देने का टारगेट पूरा करना मुश्किल नजर आता है.
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100 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन देने का है लक्ष्य
जल जीवन मिशन के जरिये 2024 तक झारखंड के सभी ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देने का टारगेट रखा गया है. राज्य में 54 लाख परिवारों को इसका लाभ दिये जाने की कोशिश है. इनमें से फिलहाल केवल 4.37 लाख घरों में ही नल कनेक्शन सुविधा है.
2019-20 के वित्तीय वर्ष में दस लाख से अधिक परिवारों को इसका लाभ दिये जाने का लक्ष्य था. अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच इनमें से 98,000 घरों को ही इसका लाभ मिल सका. यह टोटल लक्ष्य का 10 फीसदी भी नहीं है. 2019-20 के दौरान राज्य को 267.69 करोड़ रुपये केंद्र की ओर से आवंटित किए गए थे. राज्य इनमें से केवल 103.04 करोड़ रुपये का (46.36%) ही उपयोग कर सका. इससे मार्च, 2020 के अंत तक 179.21 करोड़ रुपये (53.64%) यूं ही पड़े रह गये. राज्य में आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों में साफ पानी का अभाव है. ऐसे में चुनौतियां बढ़ रही हैं. इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी लगातार खड़ी हो रही हैं.
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राज्य में 15,229 गांवों में है नल जल आपूर्ति सेवा
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, झारखंड में 15,229 गांवों में नल जल आपूर्ति सिस्टम के होने की सूचना है. हालांकि इन गांवों में सभी परिवारों को नल कनेक्शन अभी भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. जिन परिवारों को नल कनेक्शन नहीं मिला है, वे समाज के कमजोर तबकों से हैं.
पिछड़े वर्गों, विशेषकर गरीब और अनुसूचित जाति के परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है. यदि राज्य चाहे तो नल कनेक्शन उपलब्ध कराने को ‘अभियान मोड’ पर चलाये. इससे अगले 4-6 महीने में ही ‘हर घर जल गांव’ बनाया जा सकता है. इसके अलावा 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुदान के रूप में झारखंड में पंचायती राज संस्थानों को 1,689 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इस राशि का 50% जल आपूर्ति और स्वच्छता पर खर्च करना है. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत प्रदूषित पानी के उपचार और पुनर्उपयोग के लिए भी राशि दी जाती है. ‘हर घर जल गांव’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समुचित योजना और धन जुटाने की जरूरत है.
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