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1200 करोड़ को लेकर DVC और JBVNL में विवाद, विभाग कह रहा पेमेंट एडजेस्ट करें, कंपनी बिजली काटने पर अड़ी

Chhaya

Ranchi: डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच बकाया भुगतान को लेकर पत्राचार शुरू है. डीवीसी ने 24 जून को जेबीवीएनएल को इस बाबत नोटिस भेजा है. इस साल पांच महीने में यह दूसरी बार है जब डीवीसी ने जेबीवीएनएल को इस संबंध में नोटिस जारी किया.

इसके पहले फरवरी महीने में डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच ऐसी स्थिति आयी थी. जिसके बाद सात जिलों में बिजली कटौती की गयी. दरअसल, डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच विवाद पुराना है. साल 2016 से ही दोनों के बीच बिजली खरीद मामले को लेकर काफी विवाद सामने आये है. जिसका मुख्य कारण दस साल तक डीवीसी की ऑडिटिंग नहीं होना है. जेबीवीएनएल की मानें, तो साल 2006 से 2016 तक डीवीसी की ऑडिटिंग नहीं की गयी. वहीं डीवीसी सिर्फ एक्सपेंडिचर दिखा कर बिजली टेरिफ तय करने की मांग करता गया.

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साल 2016 में डीवीसी की ऑडिटिंग की गयी. जिसमें जानकारी हुई कि टेरिफ में एक्सपेंडिचर दिखा कर, डीवीसी के पास जेबीवीएनएल का 1200 करोड़ बकाया है. इसके बाद से लगातार जेबीवीएनएल की ओर से इस भुगतान की मांग की गयी. फिलहाल मामला पावर ट्रिब्यूनल में है.

आय-व्यय की नहीं दी गयी दस साल तक जानकारी

बिजली टैरिफ वित्तीय वर्ष की शुरूआत में एडवांस में तय की जाती है. साल 2006 से 2016 तक डीवीसी ने सिर्फ बिजली उत्पादन और वितरण में एक्सपेंडिचर दिखाते हुए, बिजली टैरिफ तय किया. टैरिफ तय करने से राज्य विद्युत नियामक आयोग को डीवीसी की ओर से इनकम की भी जानकारी दी जानी थी.

जेबीवीएनएल के जीएम कमर्शियल ऋषिनंदन ने बताया कि बिजली टैरिफ तय करने से पहले दर बताने वाले कुछ लाभांश भी उसमें जोड़ते हैं. लेकिन इन दस सालों में जब भी बिजली टैरिफ तय किया गया, डीवीसी ने लाभांश नहीं दिखाया. यहां तक की इनकम की जानकारी भी नहीं दी. अब ऑडिट के बाद यह सामने आ रहा है कि डीवीसी के पास जेबीवीएनएल का 1200 करोड़ बकाया है. जिसे जेबीवीएनएल बकाये राशि में एडजेस्ट करने को कह रहा है. लेकिन डीवीसी इस बात पर राजी नहीं हो रहा है. लिहाजा जेबीवीएनएल और डीवीसी के बीच विवाद जारी है.

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टैरिफ में एडजस्ट या भुगतान करती डीवीसी

जेबीवीएनएल का कहना है कि डीवीसी इस रकम को टैरिफ में एडजस्ट करे या जेबीवीएनएल को भुगतान करे. साल 2016 के बाद से लगातार जेबीवीएनएल 1200 करोड़ के भुगतान या टैरिफ एडजेस्टमेंट को लेकर प्रयासरत है. लेकिन डीवीसी की ओर से ऐसा नहीं किया गया. फिलहाल मामला पावर ट्रिब्यूनल में है.

बात दें डीवीसी की ओर से सात जिलों में बिजली आपूर्ति की जाती है. जिसमें चतरा, कोडरमा, रामगढ़, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग है. अभी तक जेबीवीएनएल की ओर से इन सात जिलों को सेंट्रल पूल से नहीं जोड़ा गया है.

5670 करोड़ है बकाया

14 मार्च को डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच वार्ता हुई थी. इस वार्ता में सहमति बनी की जेबीवीएनएल हर महीने बिजली खरीद का भुगतान करेगा. मार्च तक जेबीवीएनएल के पास डीवीसी का 4995 करोड़ रूपये बकाया था. अब पिछले तीन महीने में यह बकाया बढ़ कर 5670 करोड़ रूपये हो गया है. मार्च के बाद से जेबीवीएनएल ने डीवीसी को बकाया भुगतान नहीं किया है. हर महीने जेबीवीएनएल 200 से 250 करोड़ की बिजली डीवीसी से लेता है.

ऑडिटिंग का नहीं भारत सरकार का बकाया है- डीवीसी

इस मामले में डीवीसी के पीआरओ अभय भयंकर ने बताया कि मामला पावर ट्रिब्यूनल में चल रहा है. अभी 5670 करोड़ रूपये बकाया है. जेबीवीएनएल को यह भुगतान करना चाहिये. जेबीवीएनएल एमडी की ओर से पत्राचार के माध्यम से कुछ समय की मांग की गयी है. जिस पर डीवीसी विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि 1200 करोड़ और ऑडिटिंग का कोई मामला नहीं है. पैसा भारत सरकार का है.

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