
Ranchi: राज्य में भूमिहीन व्यक्तियों को अगर उनके निवासित जगह से बेदखल किया जाता है तो वे अंचल अधिकारियों के पास इसकी शिकायत कर सकते हैं. अंचल अधिकारियों के पास ऐसी शक्ति है कि वे इन मामलों की पूरी जांच कर भूमिहीन व्यक्तियों के पक्ष में उचित कार्रवाई सकते हैं. दरअसल राज्य सरकार को भी कई जगह से भूमिहीन व्यक्तियों को बेदखल किए जाने की शिकायत मिल रही है. राजस्व भूमि सुधार विभाग ने हाल में की समीक्षा बैठक में अंचल अधिकारियों को इसके रोकथाम के लिए उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है.
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झारखंड में भूमिहीन व्यक्तियों के लिए बासगीत पर्चा का प्रावधान है और इसकी शिकायत अंचलाधिकारियों के पास है. इसके तहत यदि भू-स्वामियों द्वारा भूमिहीन,गृह विहीन परिवारों को अपनी जमीन या गृह या झोपड़ी निर्माण कर निवास करने की अनुमति दी गयी है,जिसका मुख्य उदेश्य उनकी खेती कार्य में सहयोग करना था. खेती के अतिरिक्त भू-स्वामियों के द्वारा वैसे बताए गये भूमिहीन गरीब परिवारों से अन्य कार्य भी लिए जाते थे जैसे बढ़ई,लोहार,कहार,कुम्हार,जूता बनाने वाले कार्य आदि. इसमें वैसे परिवारों से कहीं-कहीं बंधुआ मजदूरों के रूप में भी कार्य करवाया जाता था.
अंचलाधिकारी कुडू प्रवीण कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में कभी-कभी वेसे परिवारों को बेदखल करने की बात सामने आती है,जो कि गलत है. यदि कोई भी ऐसा परिवार जो भूमिहीन है जिनके पास कोई आवासीय भूखंड नहीं है और किसी दूसरे भू-स्वामी की जमीन पर अपना घर बनाकर रह रहे हैं तो उनके लिए सरकार के द्वारा झारखंड विशेषाधिकार व्यक्ति बासगीत पर्चा अधिनियम 1947 बनाया गया है. उसके अनुसार भूमिहीन परिवार को 2 डिसमिल से लेकर 12.5 डिसमिल तक की जमीन बंदोबस्त की जा सकेगी. यदि इस प्रकार के मामले में किसी भूमि हीन को बेदखल किया जाता है तो इसकी सूचना देने को कहा है. अंचलाधिकारी इस पर उचित कार्रवाई करेंगे. अंचल अधिकारियों के पास रैयतो को दोबारा बसाने की शक्ति भी है.
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