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NRC के खिलाफ CM नीतीश ने उठायी आवाज, कहा- बिहार में नहीं होगा लागू

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Patna: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को घोषणा की कि प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) राज्य में लागू नहीं होगा. इसके बाद इस विवादास्पद फैसले का विरोध करने वाले वह सत्तारूढ़ राजग के पहले प्रमुख सहयोगी बन गये हैं. कई गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री पहले ही इसका विरोध कर रहे हैं.

जदयू नेता ने एनआरसी लागू करने के खिलाफ आवाज उठाई तो केंद्र सरकार ने भी इस व्यापक कवायद को लेकर आशंकाओं को खारिज करने का प्रयास किया.

गृह मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने कहा कि जिस किसी का जन्म भारत में एक जुलाई, 1987 से पहले हुआ हो या जिनके माता-पिता का जन्म उस तारीख से पहले हुआ हो, वे कानून के अनुसार भारत के वास्तविक नागरिक हैं और उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम या संभावित एनआरसी से चिंता करने की जरूरत नहीं है.

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काहे का एनआरसी? बिलकुल लागू नहीं होगा: नीतीश

नये संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में प्रदर्शनों के बीच नीतीश ने अपनी पार्टी का रुख साफ किया और इस बारे में सीधा जवाब दिया. एनआरसी पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि काहे का एनआरसी? बिलकुल लागू नहीं होगा.

राजग में शामिल दलों में से जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने एनआरसी को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने के खिलाफ आवाज उठायी है.

भाजपा की एक और सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी ने भी एनआरसी पर विरोध का संकेत देते हुए नागरिकता कानून पर केंद्र सरकार से दूरी बनाने का प्रयास किया. लोजपा ने कहा कि देशभर में हो रहे प्रदर्शन बताते हैं कि केंद्र सरकार समाज के एक बड़े वर्ग के बीच भ्रम को दूर करने में नाकाम रही है.

संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने वाली लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि देश के अनेक हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग एनआरसी को संशोधित कानून के साथ जोड़कर देख रहे हैं.

कुछ दिन पहले ही कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी एनआरसी का विरोध कर चुके हैं. 

एक दिन पहले ही नीतीश ने गया में एक जनसभा में साफ किया था कि वह गारंटी देते हैं कि उनके सामने अल्पसंख्यकों के साथ अनुचित बर्ताव नहीं किया जाएगा.

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क्या कहना है गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का

पूरे देश में एनआरसी लागू करने की संभावना के सवाल पर गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि इस पर विचार-विमर्श नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि हम लोगों से यह अपील भी करते हैं कि नागरिकता संशोधन अधिनियम की तुलना असम में एनआरसी से नहीं की जाए क्योंकि असम के लिए कट ऑफ अलग है.

वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को लेकर केंद्र ने कहा कि राज्य सरकारें एनपीआर को भी लागू करने से इनकार नहीं कर सकतीं जो अगले साल लाया जाना है.

अगले साल जनगणना की कवायद के साथ लाए जाने वाले एनपीआर के संदर्भ में कहा गया कि कोई भी राज्य इससे इनकार नहीं कर सकता क्योंकि यह नागरिकता कानून के अनुरूप किया जाएगा.

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