
Jamshedpur : झारखंड अलग राज्य की लड़ाई का नायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक निर्मल महतो की जयंती पर रविवार को राज्य के सीएम हेमंत सोरेन जमशेदपुर पहुंचे. उन्होंने कदमा उलियान स्थित निर्मल महतो की प्रतिमा पर माला चढ़ाया और फिर निर्मल महतो के समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस दौरान उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, परिवहन मंत्री चंपई सोरेन, बहरागोड़ा विधायक समीर महंती, ईचागढ़ विधायक सविता महतो, घाटशिला विधायक रामदास सोरेन, जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी के अलावा पार्टी के ने कार्यकर्ता मौजूद रहे. सबसे पहले हेमंत सोरेन हेलीकॉप्टर से सोनारी एयरपोर्ट पहुंचे जहां उन्हे गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. मंच पर हेमंत सोरेन का स्वागत करते हुए बन्ना गुप्ता ने कहा कि हर विषय पर लगातार प्रयास कर रहे है मंत्री परिषद पर कोई ध्यान नहीं देता था अब मुखमंत्री बनने के बाद से विपक्ष की नजर मुख्यमंत्री पर रहती है. मुख्यमंत्री ने ओल्ड पेंशन लागू किया, युवाओं को रोजगार से जोड़ा ऐसे मुख्यमंत्री को जोहर. वहीं मंच पर मौजूद मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि शहादत दिवस और जयंती पर आते है. समय को देखते हुए उन्होंने कहा कि एक समय झारखंड आंदोलन के लिए सभी जमशेदपुर में आते है. ये पहले मुख्यमंत्री है जहां गुआ गोलीकांड में मृतकों को नौकरी दिलाने का काम किया. शहर से लेकर दिल्ली तक आम लोगों की बात पहुंचाई. ऐसे गांव जो जंगल में है वहां पहुंचकर अपने अभियान के तहत सरकारी योजनाओं को पहुंचाया. सभी को पता है कि झारखंड धनी है पर यहां की खनिज संपदा को दूसरे राज्यों ने इस्तेमाल कर लिया. आने वाले समय में ये देखने को मिलेगा की यहां मौजूद हर कंपनी में आदिवासी मूल के लोग काम करेंगे. गांवों में सरकारी स्कूलों को मॉडर्न स्कूल बनाया जा रहा है ताकि गरीबों के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करेंगे.

20 साल तक विरोधियों ने राज्य को खोखला किया, अब हो रहा सुधारने का काम : हेमंत सोरेन
मंच पर आते ही हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा जिंदाबाद के नारे लगाए गए. अपने संबोधन में सीएम हेमंत सोरेन ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि आज का दिन सभी के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा है. एक ऐसे महापुरुष को याद करने के लिए एकत्रित होते है जिन्होंने अलग राज्य के आंदोलन की शुरुआत की थी, इस राज्य का वजूद यूहीं नही बना, किसी ने थाली में सजाकर इस राज्य को नही दिया. इस राज्य के लिए कई लोग शहीद हुए.।कई महिलाएं विधवा हो गई. सिर्फ इस राज्य के लिए ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी झारखंड के लोगों का नाम है. आज इतिहास के पन्नों पर इनका नाम दर्ज होना चाहिए. लेकिन आदिवासियों और दलितों को पूछता कौन है. पर समय में बदलाव हो रहा है.।पर आज भी जो सामंती सोच है और को शोषण वर्ग है जिसके खिलाफ हमारे पूर्वजों ने उनके साथ लोहा लिया वो आज भी खत्म नहीं हो पाए. उन्होंने अलग अलग तरीके से आदिवासियों और दलितों का शोषण किया. आज भी वह जंग जारी है. कभी कभी ये सामंती सोच वाले लोग उच्च पदों पर चले जाते है फिर आदिवासियों और दलितों के लिए और भी मुश्किल हो जाता है. आज कई उदाहरण सामने मिलेंगे. याद कीजिए और सोचिए कि किस तरह से गरीबों के अधिकार को लुटा जा रहा है और इनका शोषण करने के लिए नए नए हथकंडे अपनाए जा रहे है. आज विपक्ष के लोग किस तरीके से राज्य के गरीब आदिवासियों का अस्तित्व समाप्त करने में लगे है और यही लोग देश के राज कर रहे है. आज गांव का गरीब, काम पढ़ा लिखा नौजवान देश की सीमा में देश की रक्षा करने जाते थे पर आज पुरानी व्यवस्था खत्म, आज अग्निवीर योजना के तहत चार साल की नौकरी मिलेगी और फिर उसके बाद बेरोजगारी. रेल बिकी, रेलवे स्टेशन बिका और सभी को प्राइवेट कर दिया गया. बैंकों को भी मर्ज कर दिया गया जिससे आरक्षण भी खत्म हो गया. को लोग नौकरी कर सेवानिवृत हो गए अपने बच्चों को पढ़ाई और शादी के लिए बचाकर रखा गया था उन लोगों के भी पैसों को निकाल लिया गया. पांच रुपए का प्लेटफार्म टिकट आज 50 रुपए मे मिलता है, नामक महंगे हो गए, गैस सिलेंडर महंगा हो गया. गरीब की थाली से दाल चावल गायब हो गया. जब हम 1932 का खतियान लागू करने से समस्या है, सरना धर्म लाने से समस्या है. सदन में पारित करने के पर विरोध करते है. आज सरना धर्म कोड पारित किए हुए साल हर हो चुका है पर विरोधियों द्वारा एक भी पहल नहीं की गई. भाजपा सरकार में लोग राशनकार्ड लेकर भूखे रहते थे पर जेएमएम के आने पर राशनकार्ड बनवाकर लोगों के घर घर अनाज पहुंचवाया. जब भारत सरकार से पैसे देकर अनाज मांगा तो उन्होंने अनाज देने से मना कर दिया आज खुले बाजार से अनाज खरीदकर लोगों को दिया जा रहा है. अभी साल भर ही काम किया गया है जो 20 सालों में नही हो पाया है. ये राज्य बहुत मुस्किल से मिला है. अनेक लोगों ने राज्य के लिए अपना खून बहाया है. आज बड़ी तेजी से रही का काम हो रहा है पर सरकार टांग खींचने का काम कर रही है. आज राज्य में जो भी संसाधन है उसी से राज्य को आगे बढ़ाएंगे. कागजों की जांच कर पर पाया गया कि 1,36,000 करोड़ रुपए सरकार को लेना है. लोगों का आशीर्वाद ही है जो वे अपने बातों को सीधे तरीके से रखते है. राज्य के आदिवासियों को आदिवासी बोलने पर केंद्र सरकार को शर्म आती है. नौकरी ही नही रहेगी तो रिजर्वेशन की बात कौन करेगा. अमीर अमीर होता जा रहा और गरीब गरीब होता जा रहा है. गांव मजबूत होने से ही राज्य को मजबूती मिलेगी. झारखंड देश का पहला राज्य है जहां आदिवासी दलितों के बच्चों को विदेश में पढ़ाने के लिए राज्य सरकार पैसा देगी.
26 को मुसाबनी आयेंगे सीएम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुसाबनी के श्वांसपुर में आयोजित प्रशासनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे. इसके लिए वे रांची से सीधे हेलीकाप्टर से श्वांसपुर फुटबाल मैदान में उतरेंगे. सुबह 10.30 बजे कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद वे दोपहर 1.30 बजे रांची वापस चले जाएंगे.




