
Ranchi: पूरा विश्व वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहा है. विश्व स्तर पर इसकी चर्चा हो रही है. जिससे पता चलता है कि पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ है. जिस सभ्यता को विकास के नाम से आज जान रहे हैं वास्तव में उसके कई दुष्परिणाम भी देखने को मिले हैं. जिसका खामियाजा आनेवाली पीढ़ी भुगत सकती है. उक्त बातें राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ ब्रजेश कुमार ने कहीं. वे रांची यूनिवर्सिटी के स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग में आयोजित पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. जिसकी अध्यक्षता विभागाध्यक्ष सह डीन वाणिज्य डॉ गिरीश कुमार श्रीवास्तव ने की. डॉ ब्रजेश ने आगे कहा कि पर्यावरण बचेगा तभी हम सभी बच पायेंगे. यह काफी चिंता का विषय है कि कैसे पर्यावरण को बचाया जाये.
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तापमान का बढ़ना और ओजोन लेयर के होल का बढ़ना घातक
उन्होंने पर्यावरण के अन्य पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में तापमान में इतनी अधिक वृद्धि हो जाती है. पहले ऐसा नहीं होता था. ऋतु परिवर्तन होते थे लेकिन तापमान 44 से 45 डिग्री नहीं जाता था. ओजोन लेयर का भी होल बढ़ता जा रहा है जो सबके लिए घातक है. उन्होंने कहा कि आज के अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि अपने जन्मदिन के अवसर पर एक पौधा जरूर लगायें एवं उसका संरक्षण करें. लोगों की जागरुकता से ही ये संभव है कि पर्यावरण संरक्षित हो.
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प्रकृति को बचाना एक रचनात्मक प्रयास
इस मौके पर वाणिज्य विभाग के डीन डॉ गिरीश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रकृति को बचाना एक रचनात्मक प्रयास है. क्योंकि प्रकृति खुद में शक्तिशाली है. ये एक सकारात्मक प्रयास भी है. जिसे लोगों को समझना होगा. उन्होंने कहा कि झारखंड में प्रकृति पूजा यहां की संस्कृति रही है जिसके कारण पर्यावरण संरक्षण में सहायक भूमिका का निर्वहन हो रहा है. उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों से सीख लेते हुए वर्तमान समय में पर्यावरण के संरक्षण के लिए सबको आगे आना होगा. मौके पर दीपक कुमार गुप्ता, प्रो पंकज, प्रो खुशबू राय, प्रो लावनिष गौतम, प्रो अनमोल बागे समेत अन्य शिक्षक उपस्थित थे.
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