
विभागीय सचिव के पत्र को धत्ता बनाते हुए नहीं कर रहे ऑर्किड पर कार्रवाई
29 जुलाई को की गयी कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ विभागीय सचिव के समक्ष सीएस सशरीर उपस्थित होंगे
पूर्व में पांच बार विभाग ने लिखा है पत्र, ऑर्किड अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का दिया गया है निर्देश
Chhaya
Ranchi: आखिर क्या कारण है,जो विभागीय जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बावजूद भी रांची सिविल सर्जन ऑर्किड अस्पताल पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishment Act) के तहत कार्रवाई नहीं कर रहे.
इस संबंध में छह बार स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल सर्जन को कार्रवाई करने का आदेश दिया गया. लेकिन इसके बाद भी सीएस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं. इस संबंध में 18 जुलाई को सरकार के संयुक्त सचिव मनोज कुमार सिन्हा ने सिविल सर्जन को फिर से पत्र लिखा है.
इस पत्र में सचिव की ओर से लिखा गया है कि पूर्व में पांच बार सिविल सर्जन डॉ विजय बहादूर प्रसाद को दोषी ऑर्किड अस्पताल पर कार्रवाई करने को लेकर पत्र भेजे गये हैं. लेकिन जान-बूझकर सीएस ऑर्किड अस्पताल में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. जो उनकी स्वेच्छाचारी को दर्शाता है.
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विभाग की ओर से क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत ऑर्किड अस्पताल पर कठोर कार्रवाई कर रिर्पोट विभाग को सौंपने का आदेश दिया गया था. इसके बावजूद सीएस ने मामले पर चुप्पी साध रखी है.
29 जुलाई को दस्तावेज पेश करने के आदेश
इस पूरे मामले में अब विभागीय सचिव की ओर से रांची सिविल सर्जन डॉ विजय बहादूर प्रसाद को 29 जुलाई को उपस्थित होने का आदेश दिया गया है. सोमवार को सचिव कार्यालय में मामले से संबंधित दस्तावेज लेकर उन्हें उपस्थित होने का आदेश दिया गया है.
कब-कब दिया गया कार्रवाई करने का आदेश
किसी जिले में अस्पतालों और नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन जिले में कराना पड़ता है, जिसमें सिविल सर्जन की भूमिका होती है.
इस संबंध में जांच उपरांत विभाग ने सीएस प्रसाद को 10 दिसंबर 2018, 1 जनवरी 2019, 25 फरवरी 2019, 19 मार्च 2019, 29 मार्च 2019, 3 मई 2019 को कार्रवाई कर प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने के लिए कहा. लेकिन सिविल सर्जन के द्वारा उक्त अस्पताल पर कार्रवाई नहीं की गई, इससे कई तरह के संदेह पैदा होते हैं.
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विभाग की भी नहीं सुनते सिविल सर्जन
जिनके हाथ में रांची जिले स्वास्थ्य सेवाओं का दायित्व है. वो सिविल सर्जन निजी अस्पतालों को बचाना चाहते हैं. ऑर्किड अस्पताल के मामले में जांच उपरांत दोषी पाये जाने के बाद भी, सीएस की ओर से ऑर्किड अस्पताल पर कार्रवाई नहीं की जा रही.
जबकि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सिविल सर्जन डॉ विजय बहादूर प्रसाद की कार्रवाई करने की जिम्मेवारी बनती है. इस मामले में न्यूज विंग ने पूर्व में सिविल सर्जन की प्रतिक्रिया जाननी चाहती थी.
जिस पर सिविल सर्जन ने कहा था, अगर विभाग किसी को गोली मारने कहेगी तो क्या गोली मार दें. उनका इशारा सीधे विभाग सचिव नीतिन मदन कुलकर्णी पर था.
सिविल सर्जन के कारण नहीं मिला पीड़िता को न्याय
2016 में ऑर्किड अस्पताल में गलत इलाज के कारण एक महिला की मौत हो गयी थी. मामले को लेकर पीड़ित परिजनों ने राष्ट्रपति, पीएमओ, लोकायुक्त, स्वास्थ्य विभाग झारखंड से गुहार लगायी थी.
लेकिन अब तक परिजनों को न्याय नहीं मिल पाया है.
इधर ऑर्किड अस्पताल प्रबंधन पीड़ित परिजनों पर मामले को हटाने को लेकर धमकी भी दे चुका है. विभाग की ओर से कार्रवाई के आदेश के बाद भी मामले को लेकर सिविल सर्जन की चुप्पी हैरान करने वाली है. सिविल सर्जन की कार्यशैली में निजी अस्पतालों से सांठ-गांठ झलकता है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, रांची के जानेमाने ऑर्किड सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में सितंबर 2016 में मेहरुन निशात को बुखार से पीड़ित होने के बाद परिजनों ने भर्ती कराया था. यहां गलत इलाज के कारण उसकी मौत हो गई थी.
जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन द्वारा गलत तरीके से ट्रीटमेंट और लापरवाही की बात सामने आयी थी. जांच में पाया गया कि मरीज को मलेरिया था ही नहीं, लेकिन मलेरिया की दवा चला दी गयी. 3.7 क्रिटिनिन रहने के बाद भी डायलिसिस कर दिया गया. इसके अलावा भी कई गलतियां की गयी.
मामले की जांच के लिए पीएमओ, सीएमओ, और राष्ट्रपति तक से विभाग को निर्देशित किया गया. जांच में आरोप सही पाने के बाद से विभाग लगातार रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन को ऑर्किड अस्पताल पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर रहा है. जबकि सीएस मामले पर मौन हैं.
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