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Orchid hospital:  सीएस कर नहीं रहे कार्रवाई, आर्किड अस्पताल पीड़ित परिजन को दे रहा है धमकी

आर्किड सुपरस्पेशलिटी अस्पताल एक बुखार वाले मरीज को मलेरिया की दवा चला देता है. बिना जरूरत के डायलिसिस कर देता है.

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Pravin/Gaurav

Ranchi : सुपरस्पेशलिटी अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य के लिए लोग जाते हैं. लेकिन आर्किड सुपरस्पेशलिटी अस्पताल एक बुखार वाले मरीज को मलेरिया की दवा चला देता है. बिना जरूरत के डायलिसिस कर देता है. सेहत खराब होने पर परिजन जब पूछते हैं तो  इलाज करने वाले  डाक्टर कहते हैं कि एक दिन तो सबको जाना है… फिर मरीज के परिजनों ते 18 लाख का बिल लेकर मरीज को मृत घाषित कर दिया जाता है. इसकी जांच भी हुई. आरोप सही पाये जाने पर  विभाग के आदेश के बाद भी सिविल सर्जन कार्रवाई नहीं कर रहे. सिविल सर्जन कार्रवाई नहीं कर रहे और अस्पताल प्रशासन परिजनों को लगातार घर जाकर धमकी दे रहा है. परिजन डरे हुए हैं. वे चाहते हैं कि अस्पताल पर कार्रवाई हो. पर सिविल सर्जन अस्पताल प्रशासन को बचाते ही दिख रहे हैं.

ऑर्किड अस्पताल को बचाने में अड़े सिविल सर्जन, दो जांच के बाद भी कह रहे तीसरी जांच हो

आर्किड वालों ने घर पहुंचकर धमकाया

मरीज के परिजन ने लोकायुक्त में शिकायत की है कि आर्किड के मैनेजर घर पहुंचकर केस उठा लेने की धमकी दे रहे हैं. धमकाते हुए कहा गया है कि केस उठा लें नहीं तो अच्छा नहीं होगा. शिकायतकर्ता फौजिया निशात ने कहा कि आर्किड वाले दो बार घर भी आ चुके हैं. फोन करके भी धमकाया गया है और कहा गया कि आर्किड पर कोई मुकदमा नहीं करो. महिला के पास सारी रिर्काडिंग मौजूद हैं.

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सिविल सर्जन बोले,  विभाग बोलेगा, गोली मारने, तो गोली नहीं न मार देंगे?

जब हमने सिविल सर्जन विजय बहादुर प्रसाद से कार्रवाई नहीं करने की बात जाननी चाही, तो उन्होंने कहा कि विभाग बोलेगा गोली मार दो, तो गोली नहीं न मार देंगे?  विभाग ने क्लीनिकल स्टेबलिसमेंट के तहत कार्रवाई करने को कहा है.  नियम के तहत पहले शो काज करना होता है. उन्होंने ये भी कहा कि विभाग ने  दूसरी जांच कम क्वालिफाईड लोगों से करा दी.  हमने पहली रिपोर्ट के आधार पर शो काज किया है. दूसरी रिपोर्ट में मरीज के गलत इलाज का प्रमाण भी है.  इसे सिविल सर्जन नहीं मान रहे. सिविल सर्जन ने तीसरी जांच को कह दिया है.

विभागीय आदेश पर सिविल सर्जन कह रहे, जांच ही गलत तरीके से हुई

विभाग के सचिव नितिन मदन कुलकर्णी कहते हैं कि हमने सिविल सर्जन को कार्रवाई के आदेश दिये हैं. हमने उनसे शो काज मांगा ही नहीं था. सिविल सर्जन कहते हैं कि दूसरी जांच गलत तरीके से कम क्वालिफाईड लोगों से करा दी है, इसलिए तीसरी बार जांच होनी चाहिए. पांच बार रिमाइंडर मिलने के बाद जांच वाली बात सिविल सर्जन कर रहे हैं. पर विभाग के सचिव ने कार्रवाई के आदेश के प्रतिवेदन की मांग की है. अब अस्पताल प्रशासन पर कार्रवाई कैसे होगी ये विभाग और सिविल सर्जन ही बतायें.

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क्या था मामला

आर्किड सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में सितंबर 2016 में मेहरुन निशात की मौत गलत इलाज के कारण हुई थी. जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन द्वारा गलत तरीके से ट्रीटमेंट और लापरवाही की बात सामने आयी थी. मामले की जांच के लिए पीएमओ, सीएमओ, और राष्ट्रपति तक से विभाग को निर्देशित किया गया. जांच में पाया गया कि मरीज को मलेरिया था ही नहीं और मलेरिया की दवा चला दी गयी.  3.7 क्रिटिनिन रहने के बाद भी डायलिसिस कर दिया गया. इसके अलावा भी कई गलतियां की गयी. जांच में आरोप सही पाने के बाद विभाग लगातार रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन को आर्किड अस्पताल पर कार्रवाई करने के आदेश  जारी कर रहा है.

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न्यूज विंग के सवाल

सिर्फ रिमाइंडर भेजने पर क्यों विवश है विभाग?

सिविल सर्जन अपनी बात पर अड़े रहेंगे तो कैसे होगी कार्रवाई?

जांच में अस्पताल को गलत पाये जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही तो फायदा किसको हो रहा है?

सख्त एक्शन क्यों नहीं ले रहे विभाग के सचिव?

क्या किसी के दबाव के कारण नहीं की जा रही कार्रवाई?

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