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लूट का अड्डा बना है CIP कांके, पूर्व भाजपा सांसद आरके सिन्हा के लिए 20 सालों से टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को हो रहा उल्लंघन : झामुमो

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♦सरना धर्म कोड पर राज्य सरकार केंद्र को भेजेगी प्रस्ताव

♦राज्य में कॉरपोरेट हाउसों को खेतों तक नहीं पहुंचने देगी सरकार

Ranchi : कांके स्थित सीआइपी (केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान) में टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को फॉलो नहीं किया जा रहा है. सुरक्षा कार्यों और हाउसकीपिंग के कामों के लिए सुरक्षा एजेंसी SIS को बिना टेंडर जारी किये ही काम अलॉट कर दिया जाता है. यह सिलसिला 20 सालों से जारी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सीआइपी को लूट का अड्डा करार दिया है. सोमवार को प्रेस वार्ता में पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सीआइपी में जारी करप्शन एक संगीन मसला है. ठेका में गड़बड़ियों के अलावा वहां स्थानीय को नौकरी भी नहीं दी जाती. पार्टी इस करप्ट व्यवस्था को रोकने को मंगलवार से आंदोलन पर उतरेगी.

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ऑडिट रिपोर्ट में सीआइपी पर सवाल

सुप्रियो भट्टाचार्य के अनुसार कंट्रोलर ऑफ ऑडिटर जनरल ने सीआइपी में टेंडर प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाया है. 2012 से 2017 की रिपोर्ट में इसे लिखा भी गया है. सीआइपी के निदेशक खुद को वहां का मालिक समझ बैठे हैं. यही कारण है कि आरके सिन्हा की एजेंसी को टेंडर शर्तों की प्रक्रियाओं को अपनाये बिना 20 सालों से काम आवंटित कर दिया जाता रहा है. हर साल एजेंसी को तकरीबन 4 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है. SIS के अनुसार उसके 120 स्टाफ (गनमैन, सुरक्षा गार्ड) सीआइपी में सेवा देते हैं. एक गार्ड को सब कुछ जोड़ कर 24,000 रुपये तक का पेमेंट हर माह किया जाता है. ऑडिट के दौरान जब एजेंसी से मैनपावर के कार्य दिवस और बैंक रिकॉर्ड की मांग की गयी थी तो उसने नहीं दिया. वास्तव में एजेंसी हर गार्ड से 10,000 रुपये से अधिक की वसूली कर घोटाला कर रही है. इसमें सीआइपी के डायरेक्टर की भी भागीदारी है.

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नियुक्ति में भेदभाव

सीआइपी में बाहरियों को नौकरी दिये जाने पर भी सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल उठाया. कहा कि पिछले दिनों रसोइया के लिए वेकेंसी निकली. इसमें किसी झारखंडी को मौका दिये जाने की बजाये दक्षिण भारत के किसी व्यक्ति को चुना गया. इसी तरह कई अन्य पदों पर यूपी के लोगों को रखा गया है. पार्टी अब सीआइपी की गड़बड़ियों को बेनकाब करेगी. ठेका और नौकरियों में स्थानीयों को प्राथमिकता दिये जाने के मसले पर पार्टी सरकार से आग्रह करेगी.

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मुनाफाखोरी औऱ कालाबाजारी के लिए है नया बिल

झामुमो के मुताबिक नया कृषि अध्यादेश किसान हित में नहीं है. इससे कॉरपोरेट कंपनियों को ही लाभ मिलना है. राज्य में कॉरपोरेट हाउस को खेतों तक नहीं पहुंचने दिया जायेगा. यह कानून जमाखोरी, मुनाफाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ायेगा. सरना धर्म कोड के लिए इस साल के आखिर में होनेवाले विधानसभा सत्र में राज्य सरकार पहल करेगी. वर्तमान सत्र बहुत छोटा है. 2021 में जनगणना शुरू होने से पहले राज्य सरकार केंद्र के पास अलग धर्म कोड के लिए प्रस्ताव भेज देगी.

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