
Chakradharpur : झारखंड के सबसे बड़े जनजाति बहुत जिले पश्चिम सिंहभूम के मनोहरपुर प्रखंड के छोटानागरा पंचायत में बीमारी का भयंकर प्रकोप है. पिछले कुछ दिनों के भीतर जोजोगुटू और रोडु़वा में एक-एक कर 7 लोगों की मौत हो चुकी है. मरनेवाले सात लोगों में से चार की मौत एक ही दिन 13 जुलाई को हुई. दर्जनों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं. मौतों के कारण गांवों में भय का माहौल है. इधर कई गांवों में बीमारी के फैलने और छह मौतों की सूचना मिलने के बाद भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग नहीं चेत रहा है. मेडिकल टीम और गांवों में कैंप लगाने के बदले बुधवार को मनोहरपुर के जामकुंडिया स्वास्थ्य उपकेंद्र से एक एमपीडब्ल्यू उत्तम कुमार और नर्स अंजना तिर्की को जोजोगुटू भेज कर जिम्मेदारी पूरी कर ली गयी. दोनों बाइक से जोजोगुटू पहुंचे और मरीजों का इलाज शुरू किया. एमपीडब्ल्यू उत्तम कुमार ने मरीजों की जांच के बाद बताया कि ज्यादातर ग्रामीण मलेरिया और दस्त से पीड़ित हैं. यह बीमारी पंचायत के सभी गांवों में फैली है. ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार रोगी को बुखार और दस्त होने के दो-तीन दिन बाद उसकी मौत हो जा रही है. मरनेवालों में अकेले जोजोगुटू गांव के छह लोग हैं. एक बच्चा रोडु़वा गांव का था. इन सभी को तीन दिन बुखार रहा था.
मरनेवालों के नाम
- सोमा आइंद (46) पिता अर्जुन आइंद
- मुंगली देवगम (50), पति बुधराम देवगम
- पिंकी सुरीन (13), पिता सामु सुरीन
- कोतो देवगम का 5 वर्षीय लड़का
- मिंदी कुई देवगम (45)
- रोडु़वा गांव के रुईदास चांपिया का बेटा (7) (नीचे भी पढ़ें)
बिना फिल्टर किये नदी के लाल पानी की सप्लाई हो रही
मनोहरपुर प्रखंड की प्रमुख गुरुवारी देवगम, छोटानागरा पंचायत की मुखिया मुन्नी देवगम, उप मुखिया रमेश हंसदा, मानकी लागुड़ा देवगम, छोटानागरा के मुंडा बिनोद बारिक, जोजोगुटू मुंडा कानूराम देवगम, जामकुंडिया मुंडा, कुशु देवगम, समाजसेवी सुशेन गोप आदि ने आरोप लगाया कि बाईहातु जल मीनार से छोटानागरा पंचायत के गांवों में बिना फिल्टर किये नदी के लाल पानी की आपूर्ति की जा रही है. इस दूषित पानी को पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं.
मच्छरदानी नहीं लगाने और दूषित पानी के कारण हो रही बीमारी
अविवाहित मिंदी कुई देवगम की मौत मनोहरपुर स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई. हुई. बाकी की मौत घर पर ही हो गयी. इसके अलावा रोडु़वा गांव के रुईदास चांपिया के 7 वर्षीय बेटे की मौत भी बुखार की वजह से हो गयी. गांव में इलाज करने पहुंचे एमपीडब्ल्यू उत्तम कुमार ने कहा कि बीमारी की मुख्य वजह बारिश के मौसम में मच्छरदानी का प्रयोग नहीं करना है. इसके अलावा स्वच्छ पानी और भोजन के अभाव में बीमारी फैल रही है. उन्होंने कहा कि लोग छोटानागरा या जिमकुंडिया स्थित सरकारी अस्पताल नहीं जाकर मेडिकल स्टोर से दवा लाकर खा लेते हैं. इस कारण सही इलाज नहीं मिल पाता है.
अस्पताल भवन बना लेकिन स्थायी डॉक्टर और स्टाफ नहीं
प्रखंड प्रमुख गुरुवारी देवगम कहती है कि छोटानागरा में नया अस्पताल भवन बनाया गया है, लेकिन चिकित्सक व मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं के बराबर है. चिकित्सक नियमित रूप से नहीं आते हैं. हम लोगों ने कई बार जिला प्रशासन से मांग की है कि स्थायी चिकित्सक व स्टाफ की व्यवस्था की जाये. डीएमएफटी फंड के पैसे से भी चिकित्सक की नियुक्ति करें. लेकिन स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता. छोटानागरा पंचायत की मुखिया मुन्नी देवगम और जोजोगुटू गांव के मुंडा कानूराम देवगम ने बताया कि छोटानागरा में एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जहां एक चिकित्सक और कुछ मेडिकल स्टाफ तैनात हैं, लेकिन डॉक्टर सप्ताह में मात्र दो दिन ही आते हैं, वह भी मात्र कुछ घंटे के लिए. स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद सैकड़ों ग्रामीण इलाज के लिए एक स्थानीय दवा दुकान के भरोसे पर हैं. यहां रोज दवा के लिए भीड़ देखी जा सकती है.
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मरनेवालों के नाम 


