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मध्याह्न भोजन के लिए बननेवाले सेंट्रलाइज्ड किचन की स्थिति ठीक नहीं

कई निजी कंपनियों को देना था पैसा

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Ranchi: राज्य के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए बननेवाले सेंट्रलाइज्ड किचन की स्थिति ठीक-ठाक नहीं है. राजधानी रांची समेत चाईबासा, चतरा, गुमला, रामगढ़, पश्चिमी सिंहभूम में ये किचन बनने थे. केंद्रीकृत किचन का पैसा राज्य में संचालित कंपनियों के सामाजिक कारपोरेट दायित्व (सीएसआर) फंड से दिया जाना है.

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राजधानी रांची में इस्कॉन फूड रीलिफ  फाउंडेशन को काम दिया गया है. इसमें मनोहरपुर प्रखंड में अक्षय पात्रा फाउंडेशन को जवाबदेही सौंपी गयी है. राजधानी रांची  में सीसीएल की तरफ से 7 करोड़ रुपये भी दिये गये थे. इसके लिए राजधानी के पंडरा के पास इस्कॉन  इंटरनेशनल को जमीन भी मुहैया करा दी गयी है. जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की तरफ से योजना की मॉनिटरिंग की जा रही है.

सीसीएल को चतरा में सेंट्रलाइज्ड किचन बनाने के लिए सरकार को आवेदन भी दिया गया है. सीएसआर परिषद की पिछली बैठक में मैथन पावर लिमिटेड,  हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एनटीपीसी लिमिटेड, टाटा स्टील को सेंट्रलाइज्ड किचन स्थापित करने के लिए सहयोग करने का आग्रह किया गया था. ये किचन धनबाद, लोहरदगा, गुमला, रामगढ़, चतरा और पश्चिमी सिंहभूम में बनाया जाना था. सीसीएल की तरफ से चतरा में सेंट्रलाइज्ड किचन को लेकर पार्टनरशिप सपोर्ट भी मांगा गया था.

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यहां यह उल्लेखनीय है कि अक्षय पात्रा फाउंडेशन की तरफ से चाईबासा में प्रायौगिक तौर पर सेंट्रलाइज्ड किचन की शुरुआत की गयी है. सरकार का मानना है कि सेंट्रलाइज्ड किचन के बनने से मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा. क्योंकि जो एजेंसी किचन को संचालित करेगी, उन्हें ही संबंधित स्कूलों तक डिब्बाबंद खाद्यान्न बच्चों तक पहुंचाना होगा. अमूमन मध्याह्न भोजन के लिए सरकार की तरफ से जिलावार 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाती है. इसमें सिर्फ अंडे खिलाने का खर्च ही नौ करोड़ रुपये से अधिक है.

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