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मरीज की हालत होती रही खराब, अस्पताल बनाता रहा बिल, लापरवाही ने ली जान

Ranchi :  अस्पतालों की कार्यशैली पर अक्सर प्रश्नचिन्ह लगते रते हैं और उसपर विराम नहीं लग पा रहा है. आये दिन एक नया हादसा और एक नया मामला आत रहता है, लेकिन उसके पीछे का दर्द भी अपनों को खोने वालों का रहता. उपर से आर्थिक परेशानी भी कमर तोड़कर रख देती है. मरीज व परिजनों को अस्पतालों से कोई सहानुभूति नहीं मिलती है, फिर चाहे वह रिम्स हो, सदर हो, चाहे  मेडिका या मेदांता ही क्यों ना हो. लगभग एक सा ही अनुभव हर अस्पताल से प्राप्त होता है. इस बार मामला सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल मेंदाता के चिकित्सकों की लापरवाही का है. दरअसल डकरा के रहने वाले सीसीएल कर्मी घनश्याम सिंह को राजधानी के ओरमांझी स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. सुगर लेवल कम होने की शिकायत मिलने के बाद घनश्याम सिंह का इलाज मेदांता में शुरु किया गया. लगभग 15 दिन तक घनश्याम सिंह को अस्पताल में भर्ती रखा गया, जिसमें लगभग 06 लाख रुपए खर्च भी हुए. लेकिन चिकित्सक डॉ विशाल, डॉ तापस, डॉ प्रणव उन्हें बचाने में नाकामयाब रहे. मृतक के परिजनों ने अस्पातल प्रबंधन के खिलाफ ओरमांझी थाना में शिकायत दर्ज कराया है.

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सीसीएल से किया गया था रेफर

घनश्याम सिहं सीसीएल अस्पताल में इलाजरत थे, जहां से उन्हें 22 सितंबर को मेदांता रेफर किया गया था. स्व. घनश्याम के पुत्र अविनाश ने बताया कि उनके पिताजी को मेडिकल इनटेन्सिव केयर युनिट (एमआईसीयू) में भर्ती किया गया था. जब-जब यहां के स्टाफ से पिताजी के हेल्थ के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई, इनलोगों ने बहानेबाजी शुरु कर दी. जिसका खामियाजा हम सभी को अपने पिताजी को खोकर गंवाना पड़ा.

नाक, कान, मुंह से निकला खून

घनश्याम सिंह के बेटे अविनाश ने बताया कि उनके पिताजी के नाक, कान, मुंह और मूत्रद्वार से खून बह रहा था. यह अस्पताल और यहां के चिकित्सकों की लापरवाही दर्शाती है. लेकिन अस्पताल प्रबंधन को इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ता. उल्टा प्रबंधन के कर्मचारी हमलोग से ही दुर्व्यवहार करने लगे. यहां लगभग प्रत्येक मरीज के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाता है. इस अस्पताल में इलाज नहीं सिर्फ पैसे का व्यापार होता है. रोगी एवं उनके परिजन से इनका कोई सरोकार नहीं होता.

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गंभीर परिस्थिति में था मरीज : जावेद

अस्पताल के मीडिया प्रभारी जावेद ने बताया कि मरीज को जब काफी गंभीर स्थिति में लाया गया था. उसकी किडनी और लीवर दोनों फेल हो चुके थे. इलाज के दौरान ही मरीज मृत्यु हो गई है. कोई भी डॉक्टर मरीज को मारना नहीं चाहता, इलाज के दौरान ही उसकी मृत्यु हो गई.

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