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बोकारो डीसी के फैसले से सरकार को होता 3.5 करोड़ का नुकसान, जिसे मिली थी कौड़ी के भाव जमीन उसी ने बढ़ायी बोली

Akshay Kumar Jha
Ranchi/Bokaro: ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि किसी कारोबारी को डीसी की अध्यक्षता वाली कमेटी जमीन दे दे और उस पूरे प्रकरण को सरकार का विभाग गलत करार देकर पूरी प्रक्रिया को रद्द कर दे. बोकारो में जियाडा की जमीन को लेकर यही देखने को मिला. चास अंचल के कमलाडीह मौजा में फोरलेन के पास दो एकड़ जमीन को लेकर जो कुछ भी देखने को मिला, उसपर विभाग ने साफ तौर से संदेह जाहिर किया है.

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जियाडा की पीसीसी के निर्णयों को अगर निदेशक के पास शिकायत के तौर पर रखा नहीं जाता है तो, सरकार को करीब 3.5 करोड़ का नुकसान होने वाला था. बता दें कि इस बैठक की अध्यक्षता डीसी मृत्युंजय कुमार बर्णवाल ने की थी. जिसे निदेशक उद्योग ने खारिज कर दिया. पीसीसी की बैठक में मेसर्स अविघ्न कृषि प्र. लि. का टेंडर खारिज कर अनिल सिंह की कंपनी को जमीन आवंटित कर दी गयी थी.

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जमीन की कीमत सिर्फ 2.73 करोड़ लगायी गयी थी. वहीं निदेशक का फैसला आने के बाद इस जमीन की कीमत सरकार को 6.19 करोड़ मिली. लिहाजा अगर पीसीसी के निर्णय को मान लिया जाता तो सरकार को 3.5 करोड़ का राजस्व नुकसान होता.

जिसे कौड़ी के भाव मिली थी जमीन उसी ने कीमत बढ़ायी

16 मार्च को बोकारो डीसी की अध्यक्षता वाली पीसीसी कमेटी ने जिस जमीन की कीमत 2.73 करोड़ लगाते हुए शराब कारोबारी अनिल सिंह को दे दी थी. उसी शराब कारोबारी ने दोबारा बीडिंग में कीमत 3.20 करोड़ लगायी. 18 अप्रैल को हुए टेंडर में शराब कारोबारी ने पहले के मुताबिक करीब 50 लाख ज्यादा कीमत जमीन की आंकी. लेकिन फिर भी जमीन मेसर्स अविघ्न कृषि प्राइवेट लिमिटेड के गुप्ता बर्डर्स को मिली. गुप्ता बर्डर्स ने जमीन की कीमत 6.11 करोड़ लगायी और होटल मैनेजमेंट संस्थान खोलने के लिए जमीन उन्हें मिल गयी.

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शराब कारोबारी को जमीन खरीदने की थी जल्दी

डीसी की अध्यक्षता वाली पीसीसी से जमीन मिलते ही, शराब कारोबारी अनिल सिंह जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए रेस हो गए. उन्होंने पीसीसी की बैठक के पांच दिनों के बाद यानि 22 मार्च को जमीन के लिए राशि भुगतान का प्रपोजल रखा. उन्होंने जियाडा को चिट्ठी लिखी कि उन्हें जमीन के एवज में पहली किस्त देने की अनुमति मिले. उन्होंने जमीन की कीमत का दसवां हिस्सा देने के लिए विभाग से अनुमति मांगी. लेकिन बीच में ही उद्योग विभाग से फैसले पर रोक लगा दिए जाने की वजह से जमीन पर शराब कारोबारी का कब्जा नहीं हो पाया.

विरोध करने पर अधिकारी को किया शांत, एक का तबादला

आनन-फानन में शराब कारोबारी को जमीन देने की वजह से बियाडा के सचिव मनोज जायसवाल की पावर सीज कर दी गयी. उन्हें बियाडा के नीतिगत फैसले लेने से मना कर दिया गया. उनके रहते, उनके पद पर उन्हीं के कैंडर के दूसरे अधिकारी को लाकर खड़ा कर दिया गया. दरअसल, मनोज जायसवाल बार-बार जमीन शराब कारोबारी को स्थानांतरित करने में अड़ंगा लगा रहे थे.

इस वजह से बोकारो समाहरणालय की तरफ से उनसे उनके पावर छीन लिए गए. उसके बाद दूसरे अधिकारी से सारा काम करवाया गया. वहीं बात नहीं बनती देख बियाडा में संविदा पर काम करने वाले एडीओ रंजीत कुमार पर सारा ठीकरा फूटा. उनका तबादला संथाल परगना के एसपीआईएडीए (दुमका) कर दिया गया.

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