
Dhanbad : जिला श्रम कार्यालय, बरटांड परिसर में 90 लाख की लागत से बना शेल्टर होम अपनी उपयोगिता की बाट जोह रहा है. उपयोग के अभाव में वह जुआरियों व शराबियों का अड्डा बन गया है.
रेस्क्यू किये हुए बच्चों के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग भारत सरकार के दिशा-निर्देश पर श्रम विभाग, झारखंड सरकार के फंड से बनकर तैयार आधुनिक शेल्टर होम पिछले छह महीने से ‘शो पीस’ बना हुआ है.
विडंबना यह है कि इस शेल्टर होम का संचालन कौन करेगा, इसको लेकर तंत्र का विभागीय पेच फंसा है.
जिला श्रम विभाग का कहना है कि उनके विभाग के पैसे से बना शेल्टर होम का रख-रखाव एवं संचालन जिला समाज कल्याण विभाग को करना है. वहीं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डीके सक्सेना का कहना है कि शेल्टर होम की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही जिला श्रम विभाग की है.
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किसी को फिक्र नहीं
धनबाद उपायुक्त के दिशा-निर्देश पर बना रेस्क्यू बच्चों का शेल्टर होम पर न तो जिला समाज कल्याण पदाधिकारी का ध्यान है और न ही बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी एवं बाल कल्याण समिति ही अपने स्तर से शेल्टर होम हैंडओवर लेने की दिशा में ठोस कदम उठाया है. वहीं जिला श्रम विभाग मर्गदर्शक बन बैठा है.
22 जून को धनबाद जिला चाइल्ड लाइन की बैठक में इस शेल्टर होम के हैंडओवर को लेकर चर्चा की गयी, सवाल भी उठा. लेकिन तंत्र की नींद नहीं खुली.
जिला चाइल्ड लाइन सदस्य मधुरेन्द्र सिंह ने शेल्टर होम हैंडओवर को लेकर समाज कल्याण विभाग झारखंड सरकार के सचिव अरुण एक्का से भी बातचीत की, पर समाधान नहीं निकला.
जिला श्रम विभाग, जिला समाज कल्याण विभाग से धनबाद चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने आग्रह किया कि अविलंब उस भवन को या तो श्रम विभाग या फिर समाज कल्याण विभाग हैंडओवर लेकर संचालन करे अन्यथा किसी भी एनजीओ को संचालन के लिए सुपुर्द कर दिया जाये. हालांकि इसका कोई असर पदाधिकारियों पर नहीं दिखा.
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सारी सुविधायें होंगी
बता दें कि रेस्क्यू बच्चों के लिए स्टडी रूम, इंडीविजुअल केयर प्लान, कंप्यूटर, टेलीफोन फैसिलिटी, वोकेशनल ट्रेनिंग रूम, चिकित्सा आदि की तमाम सुविधाओं के साथ रहने की व्यापक व्यवस्था के मद्देनजर दो मंजिली इमारत का निर्माण हुआ है.
महिला एवं बाल समाज कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के आदेश के आलोक में श्रम विभाग, झारखंड सरकार ने भवन निर्मा्ण के लिए राशि उपलब्ध करायी.
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